सौ बेड का चरखी दादरी सिविल अस्पताल।
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जिले का दर्जा देने के तीन साल बाद भी चरखी दादरी में प्रदेश सरकार सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं कर पाई है। सिविल अस्पताल में यह पद पिछले पांच सालों से खाली पड़ा है और इस समय बच्चों के उपचार की जिले में कोई सरकारी सुविधा नहीं है। इस समय जिले के प्राइवेट अस्पताल ही बच्चों का उपचार कराने का एकमात्र विकल्प है। जहां बच्चे के माता-पिता को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का दावा है कि पीडिट्रिशियन तैनाती की डिमांड चार साल में 40 बार हेड ऑफिस भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तैनाती नहीं हो पाई है। इस समय दादरी सिविल अस्पताल से बच्चों को भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है।
सौ बेड का सिविल अस्पताल बने छह साल से अधिक समय हो चुका है लेकिन अब तक यहां चिकित्सकों की कमी दूर नहीं की गई है। जिले में चिकित्सकों के करीब 70 फीसदी पद खाली हैं और इनमें बाल रोग विशेषज्ञ भी शामिल है। सामान्य अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ तैनात न होने के चलते जिले वासियों को बच्चों का उपचार कराने के लिए निजी अस्पतालों में जाकर जेब ढीली करनी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पिछले डेढ़ साल में 16 बार बाल रोग विशेषज्ञ तैनात करने की डिमांड हेड ऑफिस भेज चुके हैं लेकिन अब तक हालात जस के तस हैं। हेड ऑफिस ने पत्र लिखने के बाद तीन रिमाइंडर डालने के बाद भी दादरी सामान्य अस्पताल में पीडिट्रिशियन तैनात नहीं किया है। इस समय शहर के निजी अस्पताल में ही परिजन अपने बच्चों का उपचार कराने को विवश हैं। सिविल अस्पताल में बच्चों के उपचार की सुविधा नाममात्र ही है। यह स्थिति तब है जब पांच साल तक की उम्र के जिले में 47 हजार बच्चे हैं।
निजी अस्पतालों में हर माह चुकाने पड़ते हैं करीब 21 लाख
शहर में मुख्य पांच अस्पतालों में छोटे बच्चों को उपचार के लिए इस समय ले जाया जा रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो एक अस्पताल की दैनिक ओपीडी औसतन 40 रहती है और प्रति बच्चा ओपीडी फीस 150 से 170 रुपये निर्धारित है। इस दौरान कम से कम 200 रुपये की दवा भी दी जाती है। इस लिहाज से एक बार उपचार पर करीब 350 रुपये खर्च आता है। इस लिहाज से एक अस्पताल में प्रतिदिन 14 हजार और एक माह में करीब चार लाख बीस हजार की इनकम होती है। शहर में पांच अस्पताल हैं और इस लिहाज से उपचार के लिए प्रति माह वहां बच्चों के माता-पिता को करीबन 21 लाख रुपये चुकाने होते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की डिमांड हम हेड ऑफिस भेज चुके हैं। बाल-शिशु नर्सरी का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। जल्द ही सरकार सिविल अस्पताल में पीडिट्रिशियन की तैनाती कर देगी। एक अप्रैल से बाल शिशु नर्सरी शुरू कराने का हम प्रयास करेंगे। - प्रदीप शर्मा, सीएमओ, चरखी दादरी।