झोझूकलां/कादमा। गांव कादमा में दूषित पानी की निकासी के पुख्ता प्रबंध नहीं हैं। इस कारण गलियों और सड़क किनारे दूषित पानी भरा है। ऐसे में लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। स्थानीय लोग सरकार और प्रशासन से समस्या के समाधान की मांग कई बार कर चुके हैं, लेकिन, नतीजा सिफर है।
कादमा बाढड़ा उपमंडल का बड़ा गांव है। यहां की आबादी करीब 11,000 है। यहां करीब 300 दुकानें हैं। इसके बावजूद दूषित पानी की निकासी न होने के कारण गांव की गलियों, मुख्य रास्तों और सड़काें पर जलभराव होता है। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़कों के किनारे भरा दूषित पानी तालाब का रूप ले चुका है। वहीं, बस स्टैंड के आगे भी पानी भरा रहता है। इसके कारण राहगीरों व दुकानदारों को समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मूलभूत सुविधाओं का भारी टोटा है।
ग्रामीण रमेश, मनजीत, महेंद्र, राजेश, प्रवीन और दीपक आदि ने बताया कि दस हजार से अधिक की आबादी लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी का दंश झेल रही है। इतना ही नहीं, समीपवर्ती गांवों के लोग भी सामान खरीदने के लिए कादमा आते हैं। उन्हें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों की मांग है कि समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करवाकर राहत दी जाए।
लोगों की परेशानी, उन्हीं की जुबानी
- कादमा कस्बे में करीब 300 दुकानें हैं। इसके बावजूद दूषित पानी की निकासी न होने के कारण गलियों, मुख्य रास्तों और सड़काें पर जलभराव हो रहा है। इसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
-इंद्रमल अग्रवाल, दुकानदार
-कादमा करीब 24 गांवों का केंद्र बिंदु है। अब यह मिनी बाजार के रूप में विकसित हो रहा है, लेकिन, मुख्य सड़क पर हर समय जाम लगा रहता है। इसके अलावा, यहां मूलभूत सुविधाओं की कमी भी लंबे समय से बनी हुई है।
-नरेश गोयल, पूर्व जिला पार्षद
गांव कादमा में मुख्य सड़क पर नाले व डिवाइडर बनने हैं। विभाग इस परियोजना को पास कर चुका है। यह कार्य होते ही जलभराव व जाम संबंधी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा। फिलहाल, समय-समय पर दूषित पानी की निकासी कराई जा रही है।
-महेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि, कादमा