चरखी दादरी। नगर परिषद प्रशासन शहर को स्मार्ट बनाने का सपना देख रहा है जबकि उसका खजाना खाली पड़ा है। पिछले एक साल से शहरी विकास की गति कछुआ चाल है। अब परिषद प्रशासन ने सड़क, गलियों के निर्माण और पार्कों के जीर्णोद्धार के लिए 15 करोड़ के बजट की फाइल मुख्यालय भेजी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इसकी मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
दादरी को जिला मुख्यालय की लुक देने के लिए सुंदरीकरण करवाया जाएगा, जो इसी बजट राशि से होना है। सरकार की ओर से बजट जारी करने के बाद अलग-अलग विकास कार्यों के एस्टीमेट तैयार किए जाएंगे। शहरवासी लंबे समय से विकास कार्य शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
कोरोना की शुरुआत में लॉकडाउन लगने के बाद से शहर में विकास कार्य बेहद धीमी गति से हो रहे हैं। चुनिंदा कार्यों को छोड़कर नगर परिषद प्रशासन शहर में कोई खास काम नहीं करवा पाया है। इसके दो अहम कारण हैं, जिनमें एक अधिकारियों के पद खाली होना और दूसरा बजट की कमी है। वहीं नए विकास कार्यों के लिए नप का खजाना खाली है और इस स्थिति को देखते हुए ही अब सरकार से 15 करोड़ के बजट की मांग की गई है। नप सूत्रों के अनुसार नववर्ष के पहले माह में ही बजट राशि मिलने की उम्मीद है और इसके बाद इस राशि से करवाए जाने वाले विकास कार्यों का खाका तैयार किया जाएगा। बजट राशि से पार्कों की दशा सुधारने के साथ सड़कों व गलियों का निर्माण करवाया जाएगा। वहीं, नप अधिकारियों की एक एजेंसी की मार्फत शहर का सुंदरीकरण करवाने की भी योजना है। बजट मिलने के बाद ही अब शहर में विकास की चरखी दोबारा घूमेगी।
दस से अधिक सड़के पड़ी हैं जर्जर
इस समय शहर की करीब दस अंदरूनी सड़कें जर्जरी हैं जिनके तुरंत प्रभाव से निर्माण की दरकार है। इनमें से कुछ सड़कों के तो एस्टीमेट तैयार हैं, लेकिन बजट की कमी के चलते टेंडर प्रक्रिया नहीं हो पा रही। सूत्रों के अनुसार विकास कार्यों के लिए बजट मिलते ही इन सड़कों का निर्माण करवाना प्राथमिकता रहेगी। मानसून की बारिश के बाद तो शहर की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और इनसे गुजरना खतरे से खाली नहीं है।
राहत : ईओ और एमई की भी हुई तैनाती
लंबे समय से खाली पड़े ईओ के पद पर सरकार ने तैनाती कर दी है। फिलहाल रेवाड़ी ईओ अभय सिंह यादव को ही नगर परिषद का चार्ज दिया गया है। इसी प्रकार राजकुमार को एमई लगाया है और उन्होंने चार्ज संभाल लिया है। दोनों अधिकारियों की तैनाती होने पर कई माह से अटकीं विभिन्न कार्यों की 250 फाइलें अब आगे बढ़ेंगी, जिससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
चार करोड़ से अधिक का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया
नगर परिषद की आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत प्रॉपर्टी टैक्स है। पिछले लंबे समय से करीब चार करोड़ रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है और इसके लिए संबंधित भवनों के मालिकों को नोटिस दिए जा चुके हैं। नप अधिकारियों के अनुसार प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी की कवायद भी जल्द शुरू की जाएगी। शहर में करीब 35 हजार से अधिक प्रॉपर्टी धारक हैं।
हमारे पास जो बजट है उनके विकास कार्य चल रहे हैं और नए विकास कार्य करवाने के लिए बजट की कमी है। इसके चलते हमने सरकार से 15 करोड़ का बजट मांगा है और इसकी फाइल एमसीडी की मार्फत मुख्यालय भेजी जा चुकी है। - प्रशांत पाराशर, सचिव, नगर परिषद