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बारिश ने बिगाड़ा स्वरूप, चलने लायक नहीं बची सड़कें

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चरखी दादरी। मानसून सीजन में हुई करीब 320 एमएम बारिश में जिले की दस से अधिक सड़कों की हालात बेहद खराब हो गई है। इनमें शहर की बाहरी और अंदरूनी सड़कें शामिल हैं। बारिश की मार एमडीआर (मेजर डिस्ट्रिक रोड) समेत संपर्क मार्गों पर भी देखने को मिली है। गत चार दिनों में हुई बारिश के बाद तो इन सड़कों का स्वरूप और बिगड़ गया है। यहां से गुजरते समय न केवल वाहन चालकों को परेशानी हो रही है, बल्कि हादसों का अंदेशा भी बना हुआ है। वहीं, पीडब्ल्यूडी और नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि मौसम अनुकूल होते ही ये कार्य करवा दिया जाएगा और तब यहां रोड़े डलवाए जा रहे हैं।
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संवाददाता ने गत बुधवार से शनिवार तक हुई बारिश के बाद शहर के बाहरी और अंदरूनी सड़कों का जायजा लिया। इस दौरान कुछ सड़कों पर अभी भी पानी भरा मिला जबकि कुछ सड़कों से पानी की निकासी होने के बाद गहरे गड्ढे बने मिले। शहर की अंदरूनी सड़कों की अगर बात करें तो पंचनंद चौक से कॉलेज रोड की तरफ जाने वाले सड़क पर छोटे-बड़े 150 गड्ढे हैं और इस सड़क का पुनर्निर्माण कराने की दरकार है। वहीं, शहर के रावलधी -दिल्ली बाइपास की बात करें तो करीब दो किलोमीटर लंबे रोड पर 350 से अधिक गड्ढे हैं। अहम बात यह है कि इस मार्ग से भारी वाहन गुजरने के चलते कई गड्ढे तो एक से डेढ़ फुट गहरे हैं। ऐसे में ये गड्ढे कभी भी किसी हादसे का कारण बन सकते हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कहना है कि रविवार सुबह ही इस मार्ग पर रोड़े डलवा दिए गए हैं। वहीं, महेंद्रगढ़ रोड पर कनीना मोड़ के समीप सड़क बने गड्ढों को भरने के लिए रविवार सुबह रोड़े डलवाए गए। शहर की जर्जर अंदरूनी व बाहरी सड़कों की स्थिति पर पढ़िए अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट
जानिये...किस सड़क के क्या हैं हालात
शहर के फोरलेन पर भरा पानी, डिवाइडर टूटा, रेलिंग भी कंडम
शहर के मुख्य फोरलेन (लोहारू चौक से रोहतक फाटक) की स्थिति देखें तो डीसी आवास, परशुराम चौक और टेलीफोन एक्सचेंज के समीप सड़क पर पानी भरा है। इतना ही नहीं परशुराम चौक पर लगातार जलभराव रहने से डिवाइडर को नुकसान पहुंचा है। डिवाइडर की टाइलें धंसने के साथ टूट गई हैं जबकि जहां-जहां इस मार्ग पर पानी भरा, वहां भी गड्ढे बन गए हैं। इस मुख्यमार्ग से प्रतिदिन 20 हजार से अधिक वाहन चालक गुजरते हैं।
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तीन वार्डों को नारनौल-हिसार मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले रोड पर 500 गड्ढे
वार्ड 13, 14 और 17 को सिविल अस्पताल के पिछली तरफ से होते हुए नारनौल-हिसार मुख्यमार्ग से जोड़ने वाली सड़क पर तो करीब एक किलोमीटर की दूरी में तारकोल ही गायब है। इस सड़क का निर्माण करीब तीन साल पहले हुआ था। करीब चार किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर पांच सौ से अधिक गड्ढे बने हुए हैं। यहां से प्रतिदिन दो हजार वाहन चालक गुजरते हैं। अधिकारियों का कहना है कि सड़क के पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जा चुकी है।
रावलधी-दिल्ली बाइपास पर गड्ढों के चलते हादसों का अंदेशा
रावलधी चौक से लेकर दिल्ली-जयपुर नेशनल हाईवे टी-प्वाइंट तक सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने पांच साल पहले करवाया था। मानसून की बारिश यह सड़क भी नहीं झेल पाई। बारिश से इस मार्ग पर तीन जगहों पर पानी भरा हुआ है। संवाददाता ने इस मार्ग का जायजा लिया तो 350 से अधिक गड्ढे मिले और दुपहिया वाहन चालकों के साथ कार चालक भी इन गड्ढों से परेशान नजर आए। गड्ढे इतने गहरे है कि रात के समय किसी हादसे का कारण बन सकते हैं।
शहर की ये अंदरूनी सड़कें दे गईं जवाब
परशुराम चौक से लेकर सरदार झाडू़ सिंह चौक तक, रासीवासिया धर्मशाला से प्राचीन हनुमान मंदिर रोड, कॉलेज रोड, पंचनंद चौक से कॉलेज मोड़ रोड, रविदास नगर से कलियाणा रोड भी इस समय जर्जर है। इन सड़कों से प्रतिदिन करीब दस हजार से अधिक वाहन चालक गुजरते हैं। वहीं, शहर के मेजबान चौक से हुडा सेक्टर की ओर जाने वाली सड़क भी खस्ताहाल है। इसके अलावा काठमंडी रोड और कोर्ट रोड की हालत भी बारिश के बाद खराब हो गई है।
बारिश से सड़कों को नुकसान पहुंचा है। जो सड़कें जर्जर हुई हैं उनका हम मौसम अनुकूल होते ही निर्माण कार्य शुरू करवा देंगे। कुछ की टेंडर प्रक्रिया भी हो चुकी है।
कृष्ण कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी
शहर की जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण की योजना हमने तैयार कर रखी है। मौसम अनुकूल होते ही टेंडर प्रक्रिया कर सड़कों का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
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सौहार्द शर्मा, जेई, नगर परिषद
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