चरखी दादरी। पानी की बर्बादी रोकने के लिए जिले की नहरों का 55 किलोमीटर लंबाई में नवीनीकरण होना है, लेकिन इस पर बजट का संकट बना हुआ। दो साल से 62 करोड़ की यह परियोजना ठंडे बस्ते में है। परियोजना सिरे चढ़ने से नहरों की क्षमता 200 क्यूसेक तक बढ़ जाएगी।
जिले में कैनाल, डिस्ट्रीब्यूरी, माइनर व सब माइनरों की संख्या करीब 74 है। इनमें अधिकतर की स्थिति बदहाल बनी हुई है। इससे नहरों के टूटने का खतरा भी ज्यादा बना रहता है। माइनर व सब माइनरोंं में घास व मिट्टी गिरने के कारण पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है। ये नहर ईंटों से बनी हुई हैं, जिससे पानी का रिसाव ज्यादा होता है।
ऐसे में दो साल पहले सिंचाई विभाग ने नहरों के जीर्णोद्धार के लिए 62 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की थी। इसके तहत जिले की मुख्य लोहारू नहर का 24 किमी व बधवाना नहर का 31 किमी लंबाई में नवीनीकरण होना है। ये नहर सीमेंट-कंक्रीट से बनाई जानी है। विभाग ने इसका पूरा प्रारूप तैयार कर बजट के लिए मुख्यालय भेजा था। इसके बाद से यह परियोजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।
200 क्यूसेक बढ़ेगी नहरी पानी की क्षमता
इस समय लोहारू कैनाल की पानी की क्षमता 900 क्यूसेक है। नवीनीकरण होने के बाद क्षमता 1,100 क्यूसेक हो जाएगी। इस नहर पर करीब 20 जलघर भी पड़ते हैं। इस नहर से 15 माइनर व सब माइनर भी निकलते हैं। वहीं, बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी
की क्षमता 172 क्यूसेक है। इस नहर के पानी से करीब 15 गांवों के जलघर व जोहड़ भरे जाते हैं।
35 बूस्टर व हब जलघर भी हो चुका तैयार
जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर में नल की उपलब्धता के साथ नहरों में भी पानी की क्षमता बढ़ाने पर काम करना पड़ रहा है, क्योंकि नहरी पानी से ही जलघरों में पानी डाला जाता है। लोहारू केनाल पर 35 नए बूस्टर व नीमड़ बड़ेसरा गांव में बड़े जलघर का निर्माण भी हो चुका है।
नहरों के नवीनीकरण का प्रोजेक्ट एशियन बैंक के सहयोग से पूरा होना है। जैसे ही बजट जारी हो जाएगा, प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए कागज प्रक्रिया चल रही है। - हरवीर सिंह, एसडीओ, सिंचाई विभाग