संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। चंपापुरी नाले में सीवर पानी की निकासी को लेकर पार्षद और जनस्वास्थ्य विभाग अभी भी आमने-सामने हैं। 22 दिन पहले पार्षदों ने मिट्टी का बंध लगाकर नाले में की जा रही सीवर के पानी की निकासी बंद कर दी थी। पानी का दबाव बढ़ने पर विभाग को बंध में कट लगाना पड़ रहा है जबकि पार्षद इसके खिलाफ हैं। बुधवार सुबह भी पार्षद प्रतिनिधि ने मौके पर पहुंचकर बांध में लगाए गए अवैध कट को बंद करवा दिया और इसके चलते दूषित पानी सड़क पर भर गया।
बता दें कि 22 दिन पहले सीसीआई परिसर में जाने वाले दूषित पानी को रोकने के लिए पार्षदों ने पूर्व विधायक के साथ मिलकर नाले पर बंध लगा दिया था। इसके बाद सीसीआई परिसर में दूषित पानी पहुंचना बंद हो गया था। जनस्वास्थ्य विभाग ने दूषित पानी निकासी के लिए लगाए गए बंध से समसपुर एसटीपी में पानी डालने के लिए तीन किलोमीटर लंबी खुली लाइन डलवाई गई थी, लेकिन पाइप लाइन ज्यादा पानी का दबाव नहीं झेल पा रही है। इसके चलते विभाग को बंध में कट लगाकर पानी निकालना पड़ रहा है।
बुधवार को वार्ड-दो के पार्षद प्रतिनिधि नरेंद्र दहिया ने मौके पर पहुंचकर बंध में लगाए गए कट को बंद करवा दिया। इसके चलते यहां पानी का दबाव बढ़ गया और ओवरफ्लो होकर सड़क पर भर गया। इसके चलते यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
- 20 दिन में दो बार लगाए कट, दोनों बार करवाया बंद
नाला बंद कराने के बाद जनस्वास्थ्य विभाग पिछले 20 दिन में दो बार बंध में कट लगा चुका है। दोनों दफा पार्षदों ने बंध के कट को बंद कराया है। ऐसा ही फिर से बुधवार को हुआ और मौके पर पहुंचे पार्षद प्रतिनिधि ने कहा कि वो किसी भी स्थिति में सीवर का पानी सीसीआई परिसर में नहीं डालने देंगे।
- कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी उठा मुद्दा
सीसीआई परिसर में पानी निकासी का मुद्दा बुधवार को आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी उठा। राज्य मंत्री अनूप धानक ने जनस्वास्थ्य विभाग को जल्द से जल्द सीसीआई परिसर से पानी निकासी करने का आदेश दिया।
वर्जन:
सभी पार्षदों ने मिलकर नाले में पानी की निकासी बंद कराई थी। इसके बाद विभागीय अधिकारी बंध में दो बार कट लगवा चुके हैं। दोनों बार हमने कट बंद करवाया है।
मुनेश दहिया, पार्षद, वार्ड-2
वर्जन:
बंध में हमने कट नहीं लगवाया है बल्कि पानी के दबाव से अपने आप लगा है। सीवर व्यवस्था में जल्द सुधार के लिए प्रयासरत हैं।
-बीके जावला, जेई, जनस्वास्थ्य विभाग