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विकास की धीमी रफ्तार, समस्याओं का लगा अंबार

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समसपुर में कच्ची पड़ी गली। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हुए एक साल बीत चुका है और अभी पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके चलते कई गांवों में विकास की रफ्तार धीमी है, जबकि जनसमस्याओं का अंबार लगा हुआ है। करीब आठ हजार की आबादी वाला समसपुर गांव भी इन्हीं में से एक है। संवाददाता की पड़ताल में सामने आया कि सरपंच का कार्यकाल पूरा होने के 13 माह बीतने पर भी करीब एक करोड़ के विकास कार्य परवान नहीं चढ़ पाए हैं। इसका सीधे तौर पर असर मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है और ग्रामीण भी इससे परेशान हैं।
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इस समय गांवों की कमान बीडीपीओ के हाथ में है और इसके बाद भी विकास कार्य रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। आलम यह है कि ग्राम पंचायतों के समय गांवों में जो समस्याएं थीं, वो आज भी बरकरार हैं। समसपुर के ग्रामीण भी मूलभूत सुविधाओं की कमी का दंश झेल रहे हैं और शुक्रवार को संवाददाता के सामने उन्होंने अपनी टीस बयां की। ग्रामीणों का कहना है कि 13 माह में न तो उन्हें पेयजल संकट से राहत मिली है और न ही जर्जर व कच्ची गलियों का समाधान हुआ है, जबकि समसपुर जिले के बड़े गांवों में से एक है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव की आबादी करीब आठ हजार है, जबकि यहां पांच हजार मतदाता है। इस गांव में 18 वार्ड हैं। समसपुर ग्राम पंचायत का कार्यकाल भी प्रदेश की अन्य पंचायतों की तरह 22 फरवरी 2021 को पूरा हुआ था और इसके बाद बीडीपीओ को प्रशासक नियुक्त किया गया था।
आठ गलियां होनी थीं पक्की, एक भी नहीं बनी
निवर्तमान सरपंच जगबीर ने बताया कि गांव में आठ गलियों को पक्का करवाने का काम उनका कार्यकाल पूरा होने के बाकी था। गांव में करीब एक करोड़ के विकास कार्य होने थे, लेकिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद ये विकास कार्य परवान नहीं चढ़ पाए और इसका खामियाजा अब ग्रामीण भुगत रहे हैं।
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डिप्टी सीएम के निर्देश भी बेअसर, नहीं मिला स्वच्छ पेयजल
ग्रामीणों ने बताया कि फरवरी माह में डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला दादरी में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन करने आए थे। उस दौरान उन्होंने डिप्टी सीएम के काफिला को रोक कर पेयजल समस्या रखी थी और डिप्टी सीएम ने एक सप्ताह के अंदर समाधान करवाने का आश्वासन दिया था। करीब डेढ़ माह बीतने के बाद भी नतीजा सिफर है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर वो विभागीय अधिकारियों समेत डीसी, विधायक, मंत्री तक भी मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई फायदा नहीं हुआ।
ये है समसपुर की मुख्य समस्याएं और अटके विकास कार्य:
1. पीने के पानी का समाधान
2. जलघर का जीर्णोद्धार हो
3. जोहड़ों की छंटाई करवाई जाए
4. आठ कच्ची गलियों का निर्माण हो
5. श्मशान घाट की तरफ जाने वाला रास्ता बनवाया जाए
ग्रामीण बोले: विकास की नहीं घूमी चरखी, समस्याएं जस की तस
गांव में कई गलियां कच्ची पड़ी हैं, जिससे आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक साल से गांव में कोई भी विकास कार्य नहीं हुआ है और लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। - अरुण, ग्रामीण
गांव के श्मशान घाट की तरफ जाने वाला रास्ता कच्चा है और इसके चलते अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के समय तो हालात बेहद विकट हो जाते हैं। - राकेश, ग्रामीण
पिछले करीब डेढ़ साल से पेयजल संकट गांव की सबसे बड़ी समस्या है। सरकार स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के दावे तो करती है, लेकिन विभागीय अधिकारी इन दावों को पूरा करने की बजाय खोखला साबित कर देते हैं। - विकास, ग्रामीण
गांव की समस्याओं की तरफ प्रशासन की कोई ध्यान नहीं है। कई बार उपायुक्त व अन्य अधिकारियों को अपनी समस्याओं से अवगत करवा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी समस्याएं जस की तस बनी हैं। - राजेश, ग्रामीण
बजट न होने के कारण गांव के कई विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। लगभग गांव में एक करोड़ रुपये की लागत के कार्य होने बाकी है। ग्रामीणों की सुविधाओं के लिहाज से ये कार्य जरूरी हैं। पेयजल संकट गांव की सबसे बड़ी समस्या है और लंबा समय गुजरने के बाद भी विभाग और प्रशासन समाधान नहीं करवा पाए हैं। जगबीर सिंह, निर्वतमान सरपंच, समसपुर

दूषित पानी से लबालब समसपुर गांव को जोहड़।- फोटो : CharkhiDadri

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