शहर के 400 साल पुराने एतिहासिक श्यामसर तालाब के जल्द दिन बहुरेंगे। तालाब के जीर्णोद्घार के लिए नगर परिषद द्वारा आमंत्रित किया गया टेंडर खोला गया है। सकारात्मक बात ये है कि टेंडर में दो एजेंसियों ने आवेदन किया है और इनमें से एक का चयन करने के लिए नप अधिकारियों ने फाइल हेड ऑफिस भेज दी है। निदेशालय स्तर से एक एजेंसी का नाम फाइनल होते ही नप अधिकारी इसके लिए वर्क ऑर्डर जारी कर देंगे।
शहर का एतिहासिक श्यामसर तालाब लोगों के लिए आस्था का प्रतीक भी है। तालाब के चारों ओर मंदिर बने हुए हैं। पिछले करीब दो दशक से तालाब प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। आलम ये है कि तालाब में सीवर लाइनों का दूषित पानी भी डाला जा रहा है। सितंबर 2016 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तालाब को पर्यटनस्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। दो साल तक यह घोषणा ठंडे बस्ते में पड़ी रही और इसके बाद नप अधिकारियों ने प्रशासन के आदेशों पर संज्ञान लेकर ड्राइंग और एस्टीमेट तैयार करने के लिए आर्किटेक्ट हायर किया था। कोरोना काल में सरकार ने तीन चरणों में तालाब की कायाकल्प करवाने के आदेश नप अधिकारियों को दिए थे। इतना ही नहीं सरकार ने पहले चरण के लिए छह करोड़ 59 लाख की बजट राशि भी स्वीकृत की थी। इसके बाद नप अधिकारियों ने टेंडर आमंत्रित किया था। यह टेंडर ओपन हो गया है और दो एजेंसियों ने इसके लिए आवेदन किया है। दोनों एजेंसियों के नाम नप अधिकारियों ने निदेशालय भेज दिए हैं और वहीं से अब एक का चयन किया जाएगा। नप अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी का नाम तय होते ही वर्क ऑर्डर जारी कर काम शुरू करवा दिया जाएगा।
सात साल में दो सीएम कर चुके घोषणा
सितंबर 2016 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तालाब के जीर्णोद्घार की घोषणा की थी, जो अब पांच साल बाद परवान चढ़ती नजर आ रही है। वहीं, मनोहर लाल से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी तालाब के जीर्णोद्घार की घोषणा करते हुए दो करोड़ का बजट तय किया था लेकिन उस दौरान यह घोषणा सिरे नहीं चढ़ पाई थी।
ये है अब नप की योजना
तालाब की डी- वॉटरिंग करवाकर पहले सफाई करवाई जाएगी और इसके बाद तलहटी और दीवारों की मरम्मत के साथ जरूरत अनुसार निर्माण करवाया जाएगा। तालाब के चारों तरफ वॉकिंग ट्रैक, रंग-बिरंगी लाइटें और टाइलें लगवाने की योजना है। यहां सुंदरता बढ़ाने के लिए राजस्थान के धोलपुर का लाल पत्थर भी लगाया जाना है
हर साल एक व्यक्ति लगाता है तालाब में छलांग
श्यामसर तालाब में हर साल कोई न कोई इसमें कूदकर आत्महत्या करता है। पिछले 20 सालों में 20 से अधिक शव तालाब से बरामद हो चुके हैं। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं है। कूड़ा बीनने वाले बच्चे तालाब की पहली सीढ़ी तक पहुंच जाते हैं।
वर्जन
श्यामसर तालाब का निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू करवाने की हमारी योजना है। तीन चरणों में तालाब की कायाकल्प करवाई जाएगी और इसके बाद शहर को अलग पहचान मिलेगी।
संजय छपारिया, चेयरमैन, नगर परिषद
वर्जन
फाइनल स्वीकृति के लिए फाइल हमने हेड ऑफिस भेज दी है। टेंडर ओपन हो गया है और दो एजेंसियों ने आवेदन किया है। निदेशालय से एक नाम तय होते ही वर्क ऑर्डर जारी कर हम काम शुरू करवा देंगे।
मनोज यादव, ईओ, नगर परिषद