संवाद न्यूज एजेंसी
बाढड़ा। दक्षिणी हरियाणा के किसानों के साथ बीमा कंपनियों की धांधली का मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। लोकसभा सांसद धर्मबीर सिंह ने संसद सत्र में एक बीमा कंपनी की ओर से वर्ष 2023 की खरीफ सीजन की कपास की फसल के नुकसान को ड्रोन से दर्शाकर लगभग 350 करोड़ का मुआवजा जारी न करने का मुद्दा उठाया।
सांसद ने केंद्र व प्रदेश सरकार से इस तरह के मामलों की जांच कर पीड़ित किसानों को उनका ब्याज सहित मुआवजा व बीमा कंपनी की मनमानी के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की है। इस मुद्दे के लिए क्षेत्र के किसान लंबे समय से आंदोलनरत हैं। सीएम ने भी जांच करवाने का भरोसा दिया है।
सांसद धर्मबीर सिंह ने संसद सत्र में बीमा कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि कंपनियां किसानों का शोषण कर रही हैं। सरकारी पैसे का भी दुरुपयोग कर रही हैं। बीमा कंपनियां एक तरफ तो प्रीमियम के रूप में भारी-भरकम पैसे वसूल रही हैं, वहीं, ओलावृष्टि या सूखे की चपेट में आने पर फसलों का बहुत कम मुआवजा दिया जा रहा है।
सांसद ने वर्ष 2023 के खरीफ सीजन की कपास की फसलों पर पहले सूखे की मार व फिर बेमौसमी बारिश होने से फसल खराब हो गई। उत्पादन में साठ से सौ फीसदी तक के नुकसान का झटका लगा था। राजस्व विभाग ने भी इसकी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी।
पीएम फसल बीमा कंपनी ने पहले तो आनाकानी की फिर सेटेलाइट व ड्रोन की रिपोर्ट के आधार पर मामूली मुआवजा दिया गया है, जो नाकाफी है। इससे तो कृषक को लागत भी नहीं मिल पाई है। इससे अकेले दादरी जिले को 50 से 100 करोड़ व भिवानी जिले को ढाई सौ करोड़ का नुकसान हुआ है।