जज्बे को सलाम : किसान धर्मेंद्र ने रेतीली जमीन पर उगाए सेब, बादाम और अखरोट
कान्हड़ा निवासी किसान के खेत का पीएमओ कार्यालय की टीम भी कर चुकी निरीक्षण, इस वर्ष पैदावार मिलने की उम्मीद
बाढड़ा (चरखी दादरी)। गांव कान्हड़ा निवासी किसान धर्मेंद्र ने हरियाणा के अंतिम छोर पर रेतीले टिब्बों में असंभव को संभव करते हुए सेब, बादाम व अखरोट के पौधे उगाए हैं। धर्मेंद्र के अनुसार सेब के अलावा बादाम, अंजीर, खुरमानी, अखरोट, रामफल व काजू आदि के पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं और इस वर्ष इनसे पैदावार मिलने की उम्मीद है। उसके पौधों का गत दिनों ही पीएमओ कार्यालय की टीम निरीक्षण करके गई है।
युवा किसान धर्मेंद्र श्योराण ने बताया कि वह आठ एकड़ जमीन में खेती करता है। जिसमें ऑर्गेनिक खाद का प्रयोग करता है। दो एकड़ में फलदार पौधे उगाए हैं। उसने खुद ही ऑर्गेनिक खाद व दवाई भी तैयार की हैं। उन्होंने बताया कि इसे लेकर उसकी पीएमओ ऑफिस में भी पिछले दिनों बात हुई थी। किसान ने बताया कि खेती में नई तकनीक तैयार करने पर अब तक सरकार द्वारा उसे कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है। युवा किसान धर्मेंद्र के दृढ़ इरादों व मेहनत से लगता है कि अब वो दिन दूर नहीं जब रेगिस्तान क्षेत्र में भी सेब, काजू, बादाम, अंजीर की पैदावार होगी।
युवा किसान धर्मेंद्र ने बताया कि उसने अपने खेत के दो एकड़ में फलों के पौधे लगा रखे हैं। जिसमें 200 पौधे सेब, 50 पौधे बादाम, एक पौधा अंजीर, एक पौधा खुरमानी, एक पौधा अखरोट, एक पौधा रामफल का उगा रखा है।
किसान ने बताया कि ऐसी फसलों की खेती करने से पहले पूरी जानकारी पहले लेनी चाहिए। किसान धर्मेंद्र ने बताया कि वह महाराष्ट्र, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में जाकर वहां की जलवायु व मिट्टी की जानकारी ले चुका है। उसके बाद ही उसने अपने खेत में फलों की खेती शुरू की। किसान धर्मेंद्र ने बताया कि सेब के पौधों को देखने के लिए दिल्ली पीएमओ आफिस से 21 जनवरी को टीम आई थी। टीम ने सेब के पौधों को बारे में जानकारी ली थी।