चरखी दादरी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से शुरू की गई पायलट कैशलेस स्कीम का उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को अग्रिम भुगतान की आवश्यकता के बिना तत्काल चिकित्सा देखभाल प्रदान करना है। इस योजना के तहत घायल को इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपये तक की कैशलेस आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
उपायुक्त मुनीश शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पायलट कैशलेस स्कीम के तहत सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए व्यक्ति को मनोनयन अस्पतालों में बिना किसी वित्तीय बोझ के उपचार प्राप्त होगा। इस पहल का उद्देश्य समय पर चिकित्सा देखभाल प्रदान करने में देरी को कम करना और दुर्घटना पीड़ित के जीवित रहने की संभावनाओं को सुधारना है, ताकि उपचार तक त्वरित और कैशलेस आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी विगत दिनों करनाल में प्रदेश के सभी डीसी और एसपी की मीटिंग में इस पायलट स्कीम को लेकर चर्चा की थी। उन्होंने बताया कि कोई भी सड़क दुर्घटना होती है तो उसे पुलिस कर्मचारी ई-डार पोर्टल पर अपलोड करेंगे। उसके बाद अस्पताल में पीड़ित व्यक्ति की ट्रांजेक्शन मैनेज आईडी अर्थात टीएमएस बनाई जाएगी। यह सारा कार्य ऑनलाइन किया जाएगा। सड़क दुर्घटना के बाद अगला एक घंटा घायल व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है, इसलिए यह प्रयास किया जाए कि सड़क दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस कर्मचारी या आम नागरिक घायल को नजदीक के आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य स्कीम में सूचीबद्ध अस्पताल या मल्टीस्पेशियलटी ट्रामा सेंटर में दाखिल करवा दें। दुर्घटना की सूचना पुलिस को 112 डायल सर्विस पर दी जा सकती है। पुलिस घायल को जल्दी अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नंबर की एंबुलेंस सेवा से भी संपर्क रखेगी।
ऑनलाइन जारी होगी अस्पतालों की सूची
उपायुक्त ने बताया कि यह स्कीम नेशलन हेल्थ अथॉरिटी के सौजन्य से आरंभ की गई है। अस्पतालों की सूची तैयार कर इसे ऑनलाइन जारी किया जाएगा। जिससे कि मरीज को सही स्थान पर पहुंचा कर उसका इलाज शुरू करवाया जा सके। इस योजना के अनुसार पीड़ित को सात दिन में डेढ़ लाख रुपये तक की कैशलेस आर्थिक सहायता दे दी जाएगी।