जिले के ग्रामीण क्षेत्र में खेत में उगी फसल।
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चरखी दादरी। एग्री स्टैक यानी किसानों की जमीन की यूनिक आईडी बनाने के लिए 92 नए व 36 पुराने पटवारियों को दायित्व सौंपा गया है। सरकार ने हाल में पंचायत विभाग से वापस लेकर राजस्व विभाग को यह काम सौंपा है। गांव स्तर पर पटवारी किसानों से संपर्क कर यूनिक आईडी बनाएंगे। भविष्य में यूनिक आईडी किसान की पहचान बनेगी।
सरकारी योजनाओं का लाभ आईडी के आधार पर ही दिए जाने की योजना प्रस्तावित है। जिले में चार माह से यूनिक आईडी बनाने का काम ठप था। संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से अमर उजाला समाचार पत्र के नौ जून के अंक में नामों के मिलान में फंसी एग्री आईडी, हजारों किसान परेशान शीर्षक से खबर प्रकाशित करने के बाद विभाग हरकत में आया है। जिले में करीब 67 हजार किसान हैं।
जिले के काफी गांवों में किसानों की एग्री स्टैक यानी जमीन की यूनिक आईडी नहीं बनी है। अब किसानों को यूनिक आईडी बनने की उम्मीद जगी है। जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई है वहां रिकॉर्ड में नाम, पिता का नाम व अन्य विवरण का आधार कार्ड से मिलान न होने से यूनिक आईडी नहीं बन पा रही है। सरकार की योजना है कि किसान को सभी प्रकार की सरकारी योजनाओं के लाभ यूनिक आईडी से दिए जाएं। इस पर चिंतन किया जा रहा है। ऐसे में किसान परेशान एवं दुविधा में हैं।
50 हजार किसानों की बन चुकी यूनिक आईडी : गत जनवरी माह में कृषि विभाग ने किसानों की एग्री यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू किया था जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई हैं वहां जमीन के रिकॉर्ड में नाम व पिता के नाम आधार कार्ड के अनुरूप नहीं हैं। किसी किसान के नाम के आगे सिंह नहीं हैं तो किसी के आगे कुमार नहीं है। ऐसे में आधार कार्ड से जमीन के विवरण का मिलान नहीं हो पा रहा है। गांव ढाणी फोगाट की कृषि जमीन के ऑनलाइन पोर्टल में अनेक खामियां हैं। इसी प्रकार गांव गुडाना सहित अन्य कई गांवों में भी चकबंदी न होने से यूनिक आईडी बनने में दिक्कतें आ रही हैं। अब 67 हजार में से करीब 50 हजार किसानों की यूनिक आईडी बन चुकी हैं।