चरखी दादरी। करीब छह घंटे में भरने वाले शहर के बूस्टिंग स्टेशन अब तीन घंटे में पानी से भर जाएंंगे। इसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग जलघर से सभी बूस्टिंग स्टेशन तक स्वतंत्र पेयजल लाइन डालेगा। अहम बात यह है कि नई पेयजल लाइन डालने का काम जल्द ही शुरू होगा और इसके लिए विभाग तैयारियां कर रहा है।
अधिकारियों का दावा है कि जलघरों के टैंकों की भंडारण क्षमता बढ़ाने का काम पूरा होते ही इस परियोजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। शहर के बूस्टिंग स्टेशनों तक स्वतंत्र पेयजल लाइन डलने से मौजूदा से आधे समय में ही इन्हें पानी से लबालब किया जा सकेगा।
शहर में आठ बूस्टिंग स्टेशन हैं जो दो जलघरों से जुड़े हुए हैं। इनकी अलग से लाइन बिछाए जाने के बाद मेन लाइन में कनेक्शन नहीं हो सकेंगे। सीएम घोषणा के तहत यह प्रोजेक्ट पूरा होना है। विभाग ने अगस्त 2022 में इसका एस्टीमेट तैयार कर हेड ऑफिस भेजा था।
दरअसल, इस समय बूस्टिंग स्टेशनों को जाने वाली मेन लाइनों में लोगों ने अवैध पेयजल कनेक्शन कर रखे हैं। इससे पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता है। पानी का दबाव भी कम बना हुआ है। बूस्टिंग का जलघर से सीधा कनेक्शन होने के बाद अवैध पेयजल कनेक्शन हीं रहेंगे। विभाग शहर में पेयजल प्रोजेक्ट पर विभिन्न मदों में 115 करोड़ रुपये का बजट खर्च करने जा रहा है।
एक साल से पेयजल परियोजना पर काम कर रहा विभाग
जनस्वास्थ्य विभाग शहर के हर घर में पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचाने की दिशा में एक साल से काम कर रहा है। शहर के कई भागों में ज्यादा मात्रा में पानी पहुंचता है तो कहीं कम दबाव की वजह से कम मात्रा में पानी पहुंच पाता है। पानी का समान वितरण नहीं हो रहा है। इसके लिए अलग से ड्राइंग तैयार की गई है, ताकि यह समस्या फिर से नहीं होने पाए। शहर में करीब 45 साल पुरानी पेयजल लाइनें जर्जर एवं खराब स्थिति में हैं।
शहर में पेयजल की लंबे समय से गुणवत्ता खराब
शहर में पेयजल की गुणवत्ता तो लंबे समय से नहीं है। जिस समय शहर का जलघर बना था, उस समय मेन लाइनें बिछाई गई थीं। ये मेन लाइनें अब जवाब दे चुकी हैं और इनके समानांतर ही सीवर की लाइनें भी बिछा रखी हैं। अब पेयजल लाइनों के कंंडम होने की वजह से इनमें सीवर का पानी मिक्स होकर भी सप्लाई हो रहा है।
45 साल पुराना है चंपापुरी जलघर
शहर में इस समय दो जलघर हैं। मेन जलघर चंपापुरी में और दूसरा रामनगर में बना है। चंपापुरी जलघर करीब 45 साल पुराना है। बूस्टिंग में पानी भरने के बाद ही कॉलोनियों में सप्लाई किया जाता है। हालांकि, विभाग बूस्टिंग स्टेशन संख्या बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
बूस्टिंग की नई लाइनें बिछाने का काम जल्द ही शुरू होने जा रहा है। बूस्टिंग की अलग से लाइन होने के बाद पानी अंतिम छोर तक पूरे दबाव के साथ पहुंचेगा। बूस्टिंग आधे समय में भरे जा सकेंगे। - मोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग