- जिला प्रयोगशाला को मिला है मार्च 2025 तक 3500 नमूनों की जांच का लक्ष्य, हिसार से नमूने की रिपोर्ट आने में लग जाते हैं कई दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले में मिट्टी में नाइट्रोजन व बोरोन नामक न्यूट्रेंस जांच की सुविधा नहीं है। इससे नमूने हिसार स्थित कृषि विश्वविद्यालय भेजने पड़ रहे हैं। वहींं, भूमि परीक्षण प्रयोगशाला को मार्च तक 3500 नमूनों की जांच का लक्ष्य मिला है। जिला प्रयोगशाला में 2023-24 के दौरान 8200 नमूने की जांच की गई है। इन नमूनों की जांच सीएपी मशीन से की जाती है।
सरकार ने मृदा जांच करवाने के लिए विशेष योजना बना रखी है। इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में हर साल नमूने का लक्ष्य दिया जाता है। ताकि, मिट्टी की जांच कर उसमें मौजूद पोषक तत्वाें की जानकारी मिल सके और किसान उसी अनुरूप खाद आदि का इस्तेमाल कर सके। मिट्टी के साथ पानी की जांच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दरअसल, मिट्टी की जांच करवाने के लिए खेत में कम से कम पांच स्थानों से मिट्टी एकत्रित की जाती है। लैब में जांच के लिए सैंपल भेजे जाते हैं। लैब जांच कर इसकी रिपोर्ट किसान के मृदा कार्ड में दर्ज की जाती है। किसान ऑनलाइन ही यह रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। प्रयोगशाला अधिकारियों के अनुसार, किसान 2025 के लिए मिट्टी की जांच करवाने लिए नमूने नई अनाज मंडी स्थित भूमि परीक्षण कार्यालय में जमा करवा सकते हैं। मार्च 2025 तक 3500 नमूनों की जांच पूरी की जानी है।
- हिसार से रिपोर्ट आने में लगते हैं कई दिन
जिले की लैब में मिट्टी में नाइट्रोजन व बोरोन नामक न्यूट्रेंस जांच की सुविधा नहीं होने से इनके नमूने हिसार कृषि विश्वविद्यालय भेजने पड़ते हैं। किसानों ने जिलास्तर पर ही यह सुविधा उपलब्ध करवाए जाने की मांग की है। हिसार से रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं। मिट्टी में नाइट्रोजन व बोरोन प्रमुख पोषक तत्व माने जाते हैं। यूरिया व डीएपी खाद में नाइट्रोजन ही ज्यादा मात्रा में होता है। फसली पौधे को नाइट्रोजन की अधिक जरूरत होती है।
किसान बोले : जिले में ही होनी चाहिए नमूने की जांच सुविधा
किसान हवासिंह, रणधीर, कपूर सांगवान, महेंद्र, राजेश और प्रीतम का कहना है कि मिट्टी के नमूने की जांच की सुविधा सरकार व विभाग को दादरी में ही मुहैया करानी चाहिए। अगर यहां जांच होगी तो रिपोर्ट जल्द आएगी और किसान समय रहते उपयुक्त कदम उठा सकता है। हिसार से रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते हैं। इससे किसानों का लंबा इंतजार करना पड़ता है। लंबी प्रक्रिया के चलते किसान मिट्टी की जांच कराने में हिचकते भी हैं।
वर्सन
नाइट्रोन व बोरोन नामक न्यूट्रेंस जांच के लिए नमूने हिसार कृषि विश्वविद्यालय भेजते हैं। मार्च 2025 तक 3500 नमूनों की जांच की जाएगी। किसानों से अपील है कि वे खेत के चारों कोनों व बीच से मिट्टी एकत्रित कर लैब में पहुंचाएं। किसान समय-समय पर मिट्टी व पानी की जांच करवाएं।
-प्रवीन कुमार, लैब विशेषज्ञ, भूमि परीक्षण प्रयोगशाला
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खेत में बिजित गेहूं की फसल और नजर आती मिट्टी। संवाद