चरखी दादरी। गांव बिरही कलां स्थित जिला शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संस्थान में दादरी और भिवानी जिले के 114 प्राचार्याें का प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। इसमें दादरी जिले के 36 तो भिवानी के 78 प्राचार्य भाग ले रहे हैं। शिविर में प्राचार्यों को विद्यार्थियों व स्कूल के विकास संबंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
शिविर का 29 नवंबर को समापन किया जाएगा। दरअसल, एससीईआरटी गुरुग्राम के निर्देशानुसार डाइट की ओर से क्षमता निर्माण शिविर आयोजित किया जा रहा है। इसमें डाइट प्राचार्य ज्ञानेंद्र सिंह का मार्गदर्शन रहा। बुधवार को प्राचार्य को उनके कर्तव्य व विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने की जानकारी दी गई। इसमें मास्टर ट्रेनर प्रवक्ता सुशील कुमार ने प्राचार्यों को बताया कि उन्हें एक मुखिया का फर्ज किस तरह निभाना चाहिए। मुखिया को अपने स्कूल स्टाफ व विद्यार्थियों की परेशानी हल व हल करना चाहिए।
ट्रेनर ने कहा कि हर व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक परेशानी होती हैं और इसके लिए एकतरफा नियम न रखें। दोनों पक्ष को देखकर ही समस्या का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करनी चाहिए। इससे उनका शैक्षणिक विकास पता चल सकेगा। इसमें विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम, कितना समझ आया और कितने विद्यार्थियों ने दोबारा पूछा और कितने विद्यार्थियों ने अनदेखा किया। इससे उनका परीक्षा परिणाम बेहतर होगा।
सर्विस नियमों की दी जानकारी
इससे साथ ही सभी को सर्विस नियम बताए गए। इसके अलावा स्कूल विकास के तहत भवन, लैब, रास्ते, सुंदरीकरण, कक्षाएं व शौचालय जैसी सुविधाओं को उचित प्रकार से व्यवस्थित रखने के लिए टिप्स दिए जाएंगे। शिविर में विद्यार्थियों की पूरे साल की आकलन प्रक्रिया समझाई गई। किस आधार पर उनके एसेस्मेंट नंबर लगाने चाहिए और इसमें क्या गतिविधियां करवाई जाएं।
ये भी रहे मौजूद
शिविर में डाइट प्राचार्य ज्ञानेंद्र सिंह, सहायक डॉ. राजेश गोदारा, डॉ. हरीश कुमार, ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर नवरत्न पांडेय, श्रुति कुमारी, लेखा अधिकारी नंदकिशोर, सेक्शन अधिकारी देवदत्त व कपिल कुमार और प्रवक्ता सोमबीर सिंह आदि मौजूद रहे।
आगामी दो दिनों करवाए जाएंगे ये विषय
आगामी दो दिनों में प्राचार्यों को स्कूल विकास व पॉक्सो एक्ट के विषयों पर जानकारी जाएगी। इनके तहत विभाग ने एक प्लान तैयार किया है, इससे भी उन्हें अवगत कराया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को भी शोषण संबंधी गतिविधियों से बचाने के लिए प्राचार्यों को पॉक्सो एक्ट की जानकारी दी जाएगी। ये जानकारी प्राचार्य सभा में विद्यार्थियों से साझा करेंगे। इनके अलावा महिला प्राचार्यों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी और इसमें पॉश एक्ट की जानकारी जाएगी। इसका उद्देश्य महिला कर्मचारियों के साथ कार्यस्थल पर होने वाले दुर्व्यवहार में कमी लाना है।