वायु प्रदूषण से निमोनिया, अस्थमा और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) सहित तीव्र और दीर्घकालिक श्वसन संबंधी रोग हो सकते हैं। वायु प्रदूषण से इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक हो सकता है। वायु प्रदूषण से फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। वायु प्रदूषण से संज्ञानात्मक हानि और मनोभ्रंश हो सकता है। वायु प्रदूषण से समय से पहले जन्म और जन्म के समय कम वजन का जोखिम बढ़ सकता है। वायु प्रदूषण से मृत जन्म और गर्भपात का जोखिम बढ़ सकता है।
राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी ने बताया कि वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को खुद से बचाने के लिए सावधानियां रखें। उच्च वायु प्रदूषण वाले स्थानों पर जाने से बचें जैसे धीमी और भारी यातायात वाली सड़कें, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, निर्माण स्थलों आदि के पास के क्षेत्र में जाने से बचें।
गंभीर एक्यूआई वाले दिनों में सुबह और देर शाम को खुली हवा में टहलने, दौड़ने एवं शारीरिक व्यायाम करने से बचें। सिगरेट, बीड़ी आदि न पीएं। बंद परिसर में मच्छर मारने वाली काॅइल और अगरबत्ती जलाने से बचें। पटाखें न जलाएं।
ऐसे करें बचाव
आंखों को नियमित रूप से स्वच्छ पानी से धोएं, गुनगुने पानी से नियमित गरारे करें, सार्वजनिक परिवहन या कार पूल का प्रयोग करें, घरों व कार्य स्थलों के अंदर झाडू लगाने के बजाय गीला पोछा लगाएं, सांस फूलने, सीने में तकलीफ या दर्द, खांसी, आंखों में जलन होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।