चरखी दादरी। गांव घिकाड़ा निवासी रणधीर सांगवान का परिवार महिला सशक्तीकरण की मिसाल बना हुआ है। रणधीर खुद 1975 के स्नातक हैं। उन्होंने अपनी पांच बेटियों को शिक्षा के भरपूर अवसर देकर स्वावलंबी बनाया है। उनकी सात में से छह संतानें अलग-अलग विभागों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। अहम बात यह है कि इनमें पांच बेटियां हैं।
दरअसल रणधीर सांगवान सामाजिक रूप से सक्रिय हैं। उनकी पत्नी कृष्णा अशिक्षित हैं, लेकिन उन्होंने बेटियों को शिक्षा का अवसर देने में रणधीर के फैसले की पूरी पैरवी की। रणधीर सांगवान ने बताया कि उनकी सबसे बड़ी बेटी उर्मिला 12वीं पास है। वो सरकारी नौकरी करना नहीं चाहती थी। इस समय वो नजफगढ़ में रहती है और दामाद दिल्ली पुलिस में है।
रणधीर सांगवान ने बताया कि उनकी दूसरे नंबर की बेटी शर्मिला एमए, एमफिल और पीएचडी है। इस समय वो शिक्षा विभाग में शिक्षक के तौर पर सेवाएं दे रही हैं। उनके तीसरे नंबर की बेटी प्रमिला एमए, डीपीएड और बीएड है। वो शिक्षा विभाग में डीपीई के पद पर कार्यरत हैं। चौथे नंबर की बेटी किरण एमए, एमफिल और पीएचडी है। वो हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर है और मौजूद तैनाती झज्जर थाने में है।
रणधीर सांगवान ने बताया कि पांचवें नंबर की बेटी गरिमा है। गरिमा एमए, एमफिल है और हरियाणा में डीएसपी के पद पर कार्यरत हैं। गरिमा की मौजूदा तैनाती भोंडसी में है। छठे नंबर की बेटी संतोष एमसीए, बीएससी और एमएससी पास है और वो एसबीआई में मैनेजर है। रणधीर सांगवान ने बताया कि बेटा शशि सबसे छोटा है वो भी हरियाणा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में मैनेजर के तौर पर नियुक्त है।
- बेटियों को न मानें बोझ, ये परिवार का अभिमान
रणधीर सांगवान के जीवन पर आर्य समाज का गहरा प्रभाव रहा है। उनका कहना है कि लोग अपनी बेटियों को बोझ न मानें, बस उन्हें अच्छी शिक्षा दें। ऐसा करके बेटियां स्वावलंबी बनेंगी और मां-बाप को वो बोझ नहीं बल्कि अभिमान लगेंगी।
- पिता और खुद के सपने पूरे करने के लिए हासिल की उच्च शिक्षा
रणधीर सांगवान का कहना है कि वो स्वयं शिक्षित हैं और जानते थे कि शिक्षा के बिना जीवन में कुछ नहीं है। इसके चलते उन्होंने अपने सभी सातों बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर कामयाब करने का सपना देखा था। उनकी बेटियों और बेटे ने अपनी मेहनत के बलबूते इस सपने को साकार भी किया।