चरखी दादरी। शहर के जलघरों में पानी समय रहते भरने के लिए मेन लोहारू कैनाल पर दस गुना आठ फीट आकार का हौद यानी मिनी टैंक बनकर तैयार हो गया है। यहां दोगुना क्षमता की मोटर लगाई हैं ताकि कम समय में जलघर को भरा जा सके। इतना ही नहीं नहर से मुख्य चंपापुरी जलघर तक 32 इंची पाइप लाइन बिछाई है। शहर के विभिन्न भागों में 12 किलोमीटर लंबी पाइप लाइनें बिछाई जाएंगी। अप्रैल माह से शहर का पेयजल संकट खत्म होने की उम्मीद है। शहर में 14 हजार पेयजल कनेक्शन है।
- एक दिन छोड़कर की जा रही सप्लाई
शहर मेंं इस समय एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है जबकि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि अप्रैल माह से नगर में प्रतिदिन पानी की सप्लाई की जाएगी। विभाग इस समय 115 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसके तहत नगर में पेयजल स्टोरेज क्षमता बढ़ाई जा रही है। जलघरों में स्टोरेज टैंकों का आकार बढ़ाया गया है। रामनगर व चंपापुरी दोनों जलघरों में स्टाेरेज टैंक बनकर तैयार हो चुके हैं।
वहीं, जिले में जल जीवन मिशन योजना के तहत अब प्रत्येक जलघर को नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होगा। इसके लिए जलघरों तक पेयजल लाइनें बिछाई जा रही हैं। नए व पुराने सभी जलघरों तक नहरी पानी पहुंचाया जाएगा। जहां बोरिंग ट्यूबवेल से सप्लाई की जा रही है वहां भी विभाग नहरी पानी की उपलब्धता कराने पर काम कर रहा है। विभाग इस काम में तत्परता से जुटा है। जिला में करीब 65 जलघर हैं।
विभाग पानी की बर्बादी रोकने जैसे बिंदुओं पर भी विभाग अब कदम उठाने जा रहा है। शहर में पेयजल का संकट हर मौसम में बना रहता है। शहर में पेयजल क्षमता कम होने की वजह से दिक्कत बन रही है। दूषित पेयजल आपूर्ति की हर वार्ड से शिकायतें मिलती आ रही हैं।
- अब भूमिगत पेयजल लाइन बिछाने पर है ध्यान
पहले विभाग खुले सीमेंट के नालों के माध्यम से जलघरोंं में पानी भरता था। अब भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जा रही है। नालों से पानी का रिसाव होता था और रास्ते में किसान खेतों की सिंचाई कर लेते थे। आज से तीन दशक पहले लोग कुएं, बावड़ी एवं जोहड़ के पानी से काम चला लेते थे। पेयजल के लिए कुओं का पानी अमृत के समान होता था जबकि आज कुओं का पानी जहर बना हुआ है। पहले जलघर भी इतनी संख्या में नहीं होते थे। सरकार को जलघरों के निर्माण की जरूरत हीं नहीं थी। अब गांव स्तर पर जलघर बनवाने पड़ रहे हैं और इनमें नहरी पानी की उपलब्धता करवानी पड़ रही है। इसे देखते हुए विभाग अब केवल नहरी पानी हर गांव तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
- नहरी पानी से बढ़ेगी गुणवत्ता
पानी में पोषक तत्वों के रूप में मुख्य ऑक्सीजन, आयरन, सल्फर, फ्लोराइड व फास्फेट के अलावा अन्य ऑर्गेनिक भी होते हैं। इनका संतुलित मात्रा में पानी में मौजूद होना जरूरी है। मानव शरीर में 75 प्रतिशत पानी जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। ऐसे में पोषक युक्त पानी का सेवन ही फायदा पहुंचाता है। खारा पानी का सेवन करने से पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है। पेचिस रोग की भी शिकायत हो जाती है। शरीर में सोडिक की मात्रा बढ़ जाती है। आंत संबंधी रोगों को बढ़ावा मिलता है।
वर्सन :
पर्याप्त मात्रा में पानी की उपलब्धता के लिए पाइप लाइनें बिछाई जा रही हैं। जलघर कम समय में भरने के लिए लोहारू नहर पर बनाए होद में दोगुना क्षमता की मोटरें लगाई गई हैं। पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी। पानी की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।-धीरेंद्र सांगवान, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, दादरी।