चरखी दादरी। वन विभाग जिले की हवा को जापान की मियावाकी पद्धति से सुधारेगा। इसके लिए जिले में दो ऑक्सीवन तैयार किए जाएंगे। एक जगह पर कार्य शुरू हो गया है, जबकि दूसरे जगह चिह्नित कर ली गई है। दो साइट पर 40 से अधिक प्रजातियों के 20 हजार पौधे और टॉल-ट्री लगाए जाएंगे।
दादरी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने और प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए वन विभाग ने योजना तैयार की है। इसके तहत जिले में पहली बार मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया जाएगा। इसके लिए बाकायदा दमकल विभाग कार्यालय के समीप और नेशनल हाईवे-152 डी के पास 5-5 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। मुख्यालय की ओर से स्वीकृति मिलने के बाद विभाग ने बधवाना माइनर के पास ऑक्सीवन तैयार करने के लिए काम शुरू करवा दिया है।
ये है मियावाकी पद्धति
मियावाकी पद्धति जापान की पौधरोपण तकनीक है। इस तकनीक से कम भूमि पर अधिक से अधिक पौधरोपण कर हरियाली को बढ़ाया जा सकता है। जिले में घटती हरियाली के मद्देनजर वन विभाग इस पद्धति का सहारा लेगा। इस पद्धति से 30 प्रतिशत घना जंगल तैयार होता है। पद्धति के तहत वन विभाग दादरी क्षेत्र में ऐसी पौध और पेड़ लगाएगा जो ज्यादा ऑक्सीजन देते हैं।
इस साल शहर में 150 से अधिक सूखे पेड़ कटवा चुका विभाग
इस साल वन विभाग शहर में 150 से अधिक सूखे पेड़ कटवा चुका है। समय के साथ शहर में हरियाली नहीं बढ़ पाई जबकि वाहनों की संख्या बढ़ने से प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इसके मद्देनजर विभाग, प्रशासन व आमजन को हरियाली बढ़ाने की तरफ ध्यान देना चाहिए।
वन क्षेत्र में लगेंगे ये पौधे
वन क्षेत्र में अंजन, अमला, बेल, अर्जुन, गुंज जैसे 40 से अधिक छायादार पौधों समेत फलों व फूलों के मिश्रित पौधें लगाए जाएंगे। मियावाकी पद्धति से जैव-विविधता क्षेत्र एवं माइक्रो हैबिटेट का निर्माण होता है। इस पद्धति से मृदा संरक्षण एवं भू- जल पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अधिकारियों का दावा है कि इस पद्धति से ऑक्सीजन की मात्रा काफी बढ़ेगी।
जिले में प्रदूषण बड़ी समस्या
बता दें कि जिले में करीब 300 क्रशर संचालित हैं। इतना ही नहीं प्रतिदिन पांच हजार से ज्यादा भारी वाहन शहर के बाहरी क्षेत्र से भवन निर्माण सामग्री लेकर गुजरते हैं। ये तमाम कारण है जिनके चलते जिले में प्रदूषण का स्तर ज्यादा रहता है और इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
दादरी में दो जगहों पर 5-5 एकड़ जमीन पर ऑक्सीवन तैयार किए जाएंगे। यहां करीब 20 हजार पौधे व पेड़ लगाए जाएंगे। एक साइट पर काम शुरू हो गया है जबकि दूसरे चिह्नित कर ली गई है। - हेमंत पारिक, जिला रेंज अधिकारी, वन विभाग