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कुश्ती दंगल पर रोक, प्रदेश स्तर के पहलवान खुराक के लिए परिजनों पर निर्भर

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चरखी दादरी। कोरोना महामारी के चलते कुश्ती दंगल पर रोक है और अब कई प्रदेश और राष्ट्र स्तर के पहलवान भी खुराक के लिए परिजनों पर निर्भर हैं। कुछ ऐसे पहलवान भी हैं, जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और उनके परिजन उन्हें पहलवान वाली नियमित खुराक देने में असमर्थ हैं। ऐसे कई पहलवानों ने अखाड़े में अभ्यास करना तक छोड़ दिया है। बुधवार को शहर के बहादुर सिंह अखाड़ा में पहुंची अमर उजाला टीम के समक्ष वहां मौजूद पहलवानों और कोच ने उपरोक्त हालात और कुश्ती दंगल पर रोक होने की टीस बयां की। पहलवान और कोच ने एक सुर में कहा कि कुश्ती दंगल पर लगी रोक सरकार और प्रशासन को हटानी चाहिए। उनका कहना है कि पिछले दो साल से दंगल आयोजित न होने और अभ्यास छूटने से कई प्रतिभाएं पहलवानी से मुंह भी मोड़ चुकी हैं। जिले के प्रदेश स्तरीय पहलवान और कोच से बातचीत पर अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट.....
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सरकार और प्रशासन को कुश्ती दंगल और प्रदेश और राष्ट्र स्तरीय स्पर्धाओं पर लगी रोक हटानी चाहिए। कई पहलवान ऐसे हैं जो कुश्ती दंगल जीतकर अपनी खुराक जुटाते हैं और मौजूदा दौर में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हितैष, प्रदेश स्तरीय जूनियर पहलवान
करीब एक साल तक मैं अखाड़े से दूर रही और घर पर ही थोड़ा अभ्यास किया। घर पर किए अभ्यास में अखाड़े वाली बात नहीं है। कुश्ती दंगल और प्रेक्टिस बंद होने का असर पहलवानों के शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ रहा है।
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कशिश, प्रदेश स्तरीय जूनियर पहलवान
कुश्ती दंगल बंद हैं और अखाड़ों में भी अभ्यास के लिए कम ही पहलवान पहुंच रहे है, जिसका सीधे तौर पर असर अभ्यास और खेल पर पड़ रहा है। दंगल जीतने पर पहलवान का विश्वास बढ़ता है और उसे आर्थिक परेशानी भी नहीं रहती है।
प्रिया, प्रदेश स्तरीय जूनियर महिला पहलवान
इस समय कई पहलवान खुराक के लिए परिजनों पर निर्भर हैं, जबकि पहले वे कुश्ती दंगल या मेट पर आयोजित कुश्ती स्पर्धा जीतकर अपनी खुराक खुद आसानी से जुटा लेते थेे। आर्थिक रूप से कमजोर पहलवान इस समय मानसिक परेशानियों से भी जूझ रहे हैं।
रोहित, प्रदेश स्तरीय जूनियर पहलवान
अखाड़ों में नहीं पहुंच रहे पहलवान, कोरोना का खात्मा बेहद जरूरी
अखाड़े के कोच यासीन खान ने बताया कि कोरोना के खौफ के कारण पहलवान अखाड़ों में नहीं पहुंच रहे हैं। जिले में 12 रजिस्टर्ड अखाड़े हैं, जिनमें करीब 600 पहलवान अभ्यास करते हैं। अब अखाड़ों में करीब 150 पहलवान ही पहुंच रहे हैं। आर्थिक तंगी के चलते प्रतिभावान पहलवान कुश्ती छोड़ने को विवश हैं और सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए।
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