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तीन साल कई शहरों के चक्कर लगाने के बाद बना दिव्यांगता प्रमाण-पत्र

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दिव्यांगता का प्रमाण पत्र सौंपते उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा । - फोटो : CharkhiDadri
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डीसी साहब तो मेरे लिए भगवान के समान हैं... ऐसे अफसर दादरी में बार-बार आने चाहिए। जिस काम के लिए पिछले तीन साल से चक्कर लगा रही थी, उनकी वजह से ही वह काम पूरा हो सका है। ये शब्द उस मां के हैं, जो अपने बेटे का दिव्यांग प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए पिछले तीन वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट रही थी, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
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उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा ने पीड़ित के दर्द को समझते हुए उसकी परेशानी को दूर किया। स्थानीय वाल्मीकि नगर निवासी दंपती नरेश व मंजू देवी की दो संतानें हैं। उसकी बड़ी बेटी है, लेकिन 17 साल का बेटा अभिषेक जन्म से न सुन सकता और न बोल पाता है। वह अपने लड़के का विकलांगता प्रमाण-पत्र बनवाने निकली तो कभी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड नहीं बैठता। कभी यह कहा जाता कि पहले पीजीआई से मेडिकल टेस्ट करवाकर लाओ। रोहतक पीजीआई, दादरी और भिवानी अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद भी उसके बेटे का किसी न किसी वजह से दिव्यांगता का सर्टिफिकेट नहीं बन सका। मंजू ने 20 दिन पहले दादरी उपायुक्त शिवप्रसाद शर्मा से अनुरोध किया कि उसके बेटे का दिव्यांग प्रमाण-पत्र नहीं बन रहा है, जिस कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहती है।
उपायुक्त ने मंजू की समस्या को सुना और फिर दादरी, भिवानी के सीएमओ, रोहतक पीजीआई, अग्रोहा व खानपुर मेडिकल कॉलेज के निदेशक आदि से व्यक्तिगत तौर पर बात की। रोहतक पीजीआई कोविड अस्पताल बनाने की वजह से वहां यह प्रमाण पत्र बनने का काम अभी बंद है। शुक्रवार को अपने कैंप कार्यालय में उपायुक्त ने मंजू व अभिषेक को यह प्रमाण-पत्र अपने हाथों से दिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग सहित सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी जरूरतमंद आदमी को निराश न जाने दें। जहां तक हो सके उसका कार्य पूरा करवाएं। उपायुक्त ने सर्टिफिकेट देने के बाद तत्काल अंत्योदय सरल केंद्र में विकलांगता पेंशन का लाभ दिलवाने के लिए अभिषेक का ऑनलाइन आवेदन करवाने के निर्देश दिए।
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