संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। फसल अवशेष प्रबंधन को कमाई का साधन बनाया जा सकता है। सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी देने का प्रावधान भी किया गया है। इसी कड़ी में धान की फसल के अवशेष से गोले बनाने का प्लांट लगाने के लिए सरकार की ओर से 70 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाता है।
उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया कि तकनीक के इस युग में अब फसल अवशेष परेशानी न होकर फायदे का सौदा बनते जा रहे हैं। किसान व लोग अब फसलों के अवशेष से लाखों रुपये भी कमा रहे हैं। तकनीक के माध्यम से फसलों के अवशेषों का कई प्रकार से प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में किसान फसल अवशेष प्रबंधन करके आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई योजनाएं चलाई हैं और योजनाओं को लेकर किसानों को जागरूक भी किया जाता है। सरकार के इस कदम से फसल अवशेष प्रबंधन को बल मिला और आज कई लोग केवल फसल के अवशेषों से ही लाखों रुपये कमा रहे हैं। फसल अवशेष का प्रयोग अब बिजली और प्लाई बोर्ड बनाने आदि कामों में भी होने लगा है।
उन्होंने बताया कि धान के अवशेष से गोले बनाने की तकनीक में बढ़ोतरी करके पर्यावरणीय कृषि प्रथाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में अनुसंधानकर्ता और कृषि विशेषज्ञ धान के बूटे की तिलाईकरण के नवाचार को अपना रहे हैं। यह तकनीक धान फसल अवशेष प्रबंधन की बड़ी समस्या का समाधान करने में काफी अहम है। इस तकनीक के तहत सीपीसीबी की गाइडलाइंस के अनुसार एक बार में एक टन प्रति घंटा के प्लांट के लिए 28 लाख और टोरफकशन प्लांट के लिए 56 लाख सीसीबी की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उपायुक्त ने किसानों से अनुरोध किया है कि किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता या सब्सिडी पाने के लिए सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड एवं एमएसएमई मीडियम एंड माइक्रो स्मॉल एंटरप्राइजेज के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।