हाल ही में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली भिवानी की बेटी नीतू घणघस ने चरखी दादरी में सरकार की खेल नीति पर सवाल उठाए है। एक सम्मान समारोह में शिरकत करने पहुंची नीतू घणघस ने कहा कि अगर खिलाड़ियों को अभ्यास की जगह जंतर-मंतर पर बैठना पड़ेगा तो देश को मेडल का नुकसान होगा। सरकार को खेल नीतियों में सुधार करना चाहिए। महिला मुक्केबाज नीतू घणघस ने भिवानी साई से बॉक्सिंग हटाने के फैसले पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह भिवानी से बॉक्सिंग खत्म करने की साजिश है। युवा मुक्केबाजों के लिए तो ये बहुत ही बुरी खबर है।
वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिन की स्वर्ण पदक विजेता महिला मुक्केबाज
उन्होंने कहा कि मुक्केबाजी में पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक भिवानी साई ने ही देश को दिलाया है। उन्होंने कहा कि खेल मंत्री को न केवल यह निर्णय बदलना चाहिए, बल्कि भिवानी साई में महिला मुक्केबाजों के लिए भी हॉस्टल की व्यवस्था करवानी चाहिए। इससे महिला खिलाड़ियों को काफी फायदा होगा। विनेश फौगाट, बजरंग पूनिया और अन्य पहलवानों के कुश्ती फेडरेशन के खिलाफ मोर्चा खोलने के मामले पर भी नीतू घणघस ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले पहलवान अभ्यास छोड़कर जंतर-मंतर पर धरना दिया था। अगर ऐसे ही खिलाड़ी करते रहे तो देश को मेडल नहीं मिलेंगे। सरकार को खिलाड़ियों का साथ देना चाहिए।
एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक लाना अगला लक्ष्य
नीतू घणघस ने कहा कि कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक जीतना सुखद अनुभव था। इसके बाद वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जो पूरा हो गया। अब अगला लक्ष्य एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना है और इसके जरिये ही कॉमनवेल्थ चयन का कोटा तय होगा। इसके लिए पूरी लग्न के साथ तैयारी जारी है।