संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में आठ माह से बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली पड़ा है। इसके चलते बच्चों के उपचार के लिए माता-पिता के पास निजी अस्पताल ही एकमात्र विकल्प है।
इस मौसम में बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, ऐसे में सिविल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की कमी खल रही है। सिविल अस्पताल में 28 साल बाद मई 2023 में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई थी। करीब पांच माह तक जिले में बाल रोग विशेषज्ञ ने सेवाएं दीं और 8 माह पहले ही उनका तबादला हो गया। इसके बाद सरकार ने महिला बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में पिछले लंबे समय से ये पद खाली है।
शहर में मुख्य पांच निजी अस्पतालों में छोटे बच्चों का उपचार होता है। सूत्रों की मानें तो एक अस्पताल की दैनिक ओपीडी औसतन 40 रहती है और प्रति बच्चा ओपीडी फीस 150 से 200 रुपये निर्धारित है। इस दौरान कम से कम 200 रुपये की दवा भी दी जाती है। इस लिहाज से एक बार उपचार पर करीब 300 से 500 रुपये खर्च आता है। इस लिहाज से उपचार के लिए प्रति माह वहां बच्चों के अभिभावकों को करीबन 21 लाख रुपये चुकाने होते हैं।
कम से कम 50 बच्चे पहुंचते हैं उपचार के लिए
सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी 1300 से 1400 रहती है। यहां प्रतिदिन उपचार के लिए 50 से ज्यादा बच्चे पहुंचते हैं। सामान्य बीमारी में तो मेडिकल ऑफिसर की ओर से परामर्श और दवाएं दे दी जाती हैं, जबकि गंभीर बीमारी में बच्चे को उपचार के लिए भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन उपचार के लिए 50 से अधिक बच्चे पहुंचते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता बच्चे के मुफ्त उपचार के लिए रोहतक पीजीआई और भिवानी की भागदौड़ करने को विवश हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग मुख्यालय भेज चुके हैं। एनएचएम के तहत स्थानीय स्तर पर भर्ती का प्रयास भी किया जा रहा है। जल्द ही विशेषज्ञ की तैनाती होने की उम्मीद है। - डॉ. नरेश, कार्यवाहक सीएमओ, चरखी दादरी