चरखी दादरी। मकर संक्रांति पहले शिक्षा विभाग ने प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम से जुड़े पूर्व अनुदेशकों को बड़ी सौगात दी है। करीब चार दशक से लंबित वेतन एरियर का भुगतान होने से 40 बुजुर्ग पूर्व अनुदेशकों के चेहरों पर वर्षों बाद संतोष और खुशी साफ दिखाई दी। शिक्षा विभाग द्वारा न्यायालय के आदेशों का पालना करते हुए यह भुगतान किया गया जिसे पूर्व अनुदेशक अपने जीवन का अहम और भावनात्मक क्षण बता रहे हैं। मंगलवार को सभी लाभार्थी पूर्व अनुदेशक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष, प्रतीक्षा और निराशा के बाद आखिरकार उन्हें उनका अधिकार मिला है। यह भुगतान केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके सम्मान और योगदान की पुनर्स्थापना भी है।
जानिए...क्या है मामला
भारत सरकार द्वारा निरक्षरों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम के तहत अनुदेशकों की भर्ती की गई थी। वर्ष 1987 में न्यायालय ने आदेश दिए थे कि सितंबर 1985 से दसवीं पास अनुदेशकों को जेबीटी ग्रेड दिया जाए। हालांकि फरवरी 1990 में अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं और उस अवधि का बढ़ा हुआ वेतन एरियर पूर्ण रूप से भुगतान नहीं हो सका। अब पूर्व अनुदेशकों को एकमुश्त 23,232 रुपये एरियर के रूप में दिए गए हैं। दादरी जिले से कुल 90 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें दस्तावेज पूर्ण होने पर 40 पूर्व अनुदेशकों को भुगतान किया जा चुका है।
1985 से अटका था एरियर
जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि न्यायालय की ओर से सितंबर 1985 से प्रौढ़ शिक्षा अनुदेशकों को प्राथमिक शिक्षक का ग्रेड देने के आदेश पारित किए गए थे। हालांकि, उस समय विभिन्न प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कारणों के चलते बढ़े हुए वेतन एरियर का भुगतान नहीं हो पाया। अब शिक्षा विभाग ने सभी औपचारिकताएं पूरी कर न्यायालय के आदेशों के अनुसार बकाया वेतन एरियर का भुगतान कर दिया है।
कर्मचारियों ने किया सहयोग
इस पूरे प्रकरण में उल्लास कार्यक्रम के पूर्व कोऑर्डिनेटर हरपाल आर्य की भूमिका भी अहम रही। उनके द्वारा वेतन एरियर की विस्तृत गणना की गई और पूर्व अनुदेशकों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज पूरे करवाने में लगातार सहयोग किया गया। इसी समन्वय और प्रयासों के चलते वर्षों से लंबित भुगतान संभव हो सका। वहीं लिपिक अजित सिंह ने बताया कि जिन मामलों में दस्तावेज शेष हैं, उनका भी भुगतान प्रक्रिया पूरी होते ही किया जाएगा।
एरियर पाकर पूर्व अनुदेशक हुए गदगद
पूर्व अनुदेशक दलीप सिंह, राजेंद्र प्रसाद, फूलपति सहित अन्य लाभार्थियों ने इसे अपने लिए किसी उत्सव से कम नहीं बताया। उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर मिला यह भुगतान उनके लिए बड़ी राहत है। साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन का धन्यवाद किया। पूर्व अनुदेशकों का मानना है कि यह निर्णय न केवल उनके लिए बल्कि भविष्य में अन्य लंबित मामलों के समाधान के लिए भी सकारात्मक संदेश देगा। शिक्षा विभाग की ओर से उठाया गया यह कदम प्रशासनिक संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण है।
वर्जन
शिक्षा विभाग का निरंतर प्रयास है कि वर्षों से लंबित मामलों को संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ निपटाया जाए। प्रौढ़ शिक्षा अनुदेशक समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्होंने निरक्षरों को साक्षर बनाने और शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना विभाग का नैतिक और सामाजिक दायित्व है।- धर्मेंद्र चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी, दादरी