संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को निजीकरण विरोध दिवस मना रहे प्रदर्शनकारियों ने की उपायुक्त कार्यालय पर तैनात पुलिस कर्मियों से धक्कामुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों की भीड़ के आगे पुलिस के जवान भी पहले तो सख्ती दिखाते रहे लेकिन फिर उन्होंने इनको जाने दिया। जिसके बाद प्रदर्शनकारी जबरदस्ती उपायुक्त कार्यालय में घुस गए और नारेबाजी की। इस हंगामे के बीच उपायुक्त खुद अपने कक्ष से बाहर निकलकर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और ज्ञापन लिया।
सोमवार को पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार सुबह 10: 30 बजे विभिन्न कर्मचारी संगठन व किसान संगठनों के लोग रेलवे स्टेशन परिसर में एकत्रित हुए। यहां करीब ढाई घंटे तक निजीकरण के विरोध में कर्मचारी एवं किसान संगठनों ने धरना दिया। धरने को संबोधित करते हुए सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान राजकुमार घिकाड़ा, सीआईटीयू जिला प्रधान कमलेश भैरवी, इंटक नेता सुशील कुमार व व्यापार मंडल जिला प्रधान जयभगवान मस्ताना कहा कि सरकार की हठधर्मिता के कारण आज समाज का हर वर्ग भाजपा सरकार से नाखुश है। देश में जगह-जगह लोग धरने दे रहे हैं। किसान दिल्ली में बॅार्डर पर डटे हैं। कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार किसी की बात नहीं सुन रही है। इस अवसर पर विजय लांबा, पीडब्ल्यूडी शाखा प्रधान सुभाष, सुरता राम, जगबीर तक्षक, कृष्ण जांगड़ा, विद्यानंद कमोद, धर्मबीर, राजेश कासनी, अशोक रावलधी, धर्मबीर, कर्ण सिंह आदि मौजूद रहे।
ज्ञापन लेने नायब तहसीलदार से बोला प्रदर्शनकारी - ‘तू कौन हैं’
रेलवे स्टेशन से करीब एक बजे सभी प्रदर्शनकारी जुलूस निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। इस दौरान इन्होंने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की मांग रखी। इस पर पहले नायब तहसीलदार ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन सौंपने से मना कर दिया। इसी बीच किसी प्रदर्शनकारी ने नायब तहसीलदार से पूछ लिया कि ‘तू कौन हैं’। इस पर नायब तहसीलदार ने कहा कि ‘आपको बोलने की तमीज नहीं है क्या’। इस पर अधिकारी व प्रदर्शनकारियों के बीच नोंकझोंक शुरू हो गई। इस पर नायब तहसीलदार वहां से चले गए। इसके बाद बीडीओ और फिर सीटीएम प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारी उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़े रहे और इन अधिकारियों को ज्ञापन देने से स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया।
उपायुक्त के न आने पर बिफरे प्रदर्शनकारी
ज्ञापन लेने के लिए बार-बार अन्य अधिकारियों के पहुंचने और उपायुक्त के न आने से प्रदर्शनकारी बिफर गए। इसके बाद सभी ने उपायुक्त कार्यालय की तरफ रुख कर लिया। उपायुक्त कार्यालय के पास पुलिस कर्मचारियों ने इन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन ये जोर-जबरदस्ती से उपायुक्त में घुस गए। इस दौरान उपायुक्त राजेश जोगपाल अपनी सीट पर बैठे हुए थे। उपायुक्त कार्यालय में घुसे कुछ प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी उपायुक्त कार्यालय के गेट के बाहर बैठ गए। इसी बीच उपायुक्त कार्यालय से बाहर आए और उन्होंने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। ज्ञापन सौंपने के बाद सभी प्रदर्शनकारी वहां से चले गए।
40-50 लोग बैंकों के निजीकरण व किसान आंदोलन को लेकर ज्ञापन सौंपने आए थे। मैंने नायब तहसीलदार व सीटीएम को भेजा था, लेकिन उन्होंने उन्हें ज्ञापन सौंपने से मना कर दिया। इस पर मैंने 15-20 लोगों को कार्यालय में आकर ज्ञापन सौंपने को कहा था। मगर वे लोग आक्रोश में आ गए और इसी आक्रोश में वे मेरे कार्यालय में घुस गए। हालांकि मैंने उनसे ज्ञापन ले लिया है जो राष्ट्रपति के नाम है। प्रशासन के अधिकारियों से दुर्व्यवहार किया गया है। चूंकि ये अपने ही जिले के लोग हैं तो इनके खिलाफ क्या कार्रवाई करनी।
- राजेश जोगपाल, उपायुक्त