चरखी दादरी। डार्क जोन में शामिल 35 गांवों में नहरी पानी आपूर्ति शुरू करने की योजना को जनस्वास्थ्य विभाग अब तक धरातल पर अमलीजामा नहीं पहना पाया है। 97.17 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट पर जगह चयन का पेच फंसा है। नीमड़-बड़ेसरा में बनने वाले हब जलघर के लिए जमीन का पेच फंसने पर विभाग ने चांदवास में काम शुरू करवाना चाहा, लेकिन वहां के ग्रामीणों ने इस पर ऐतराज जताते हुए कोर्ट की शरण ले ली। ग्रामीणों का तर्क है कि विभाग ने नियमों के खिलाफ जगह का चयन किया है और इस मसले पर कोर्ट ने 30 नवंबर को बीडीपीओ और जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ को सुनवाई के लिए तलब किया है। याची पक्ष का कहना है कि 21 अक्तूबर को ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार ही चिह्नित जगह पर जलघर का निर्माण करवाया जाए तो उन्हें कोई ऐतराज नही है।
97 करोड़ से अधिक की धनराशि वाले इस प्रोजेक्ट के टेंडर गत मार्च में अलॉट हुए थे। विभाग की योजना अनुसार पहले नीमड़ बड़ेसरा में हब जलघर का निर्माण करवाया जाना था। टेंडर अलॉटमेंट के बाद जब जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा हायर की गई एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची तो उस दौरान वन विभाग ने चिह्नित जगह को अपना बताया। इसके बाद से ही काम शुरू नहीं हो पाया। इसके बाद चांदवास में हब जलघर के निर्माण की योजना तैयार की गई लेकिन वो भी अब सिरे नहीं चढ़ पाई है। चांदवास में यह योजना सिरे न चढ़ पाने का कारण जमीन चयन को लेकर ग्रामीणों की असंतुष्टि है।
पंचायत समिति के पूर्व सदस्य राकेश चांदवास के अनुसार गत 21 अक्तूबर को ग्राम सचिव, जेई और ग्रामीणों की मौजूदगी में ग्राम सभा हुई थी। इसमें जलघर निर्माण के लिए जो प्रस्ताव पास किया गया था, उसके तहत जेवली रोड पर बाढड़ा की तरफ खसरा नंबर 23, 33 व 34 क जमीन पर जलघर निर्माण तय हुआ था। इस प्रस्ताव पर करीब 250 ग्रामीणों ने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने बताया कि बावजूद इसके जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दूसरी जगह पर जलघर का निर्माण शुरू करवाने के लिए पेड़ों को उखाड़ दिया। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में वन विभाग की टीम अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें बिन अनुमति पेड़ काटने का जिक्र है। राकेश ने बताया कि जनस्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव के विपरीत जलघर का निर्माण करवाने पर ही उन्होंने और राजबीर नामक ग्रामीण ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले की 30 नवंबर को सुनवाई होनी है और इसके लिए कोर्ट ने बीडीपीओ और एसडीओ को तलब किया हुआ है। उन्होंने बताया कि हालांकि बीडीपीओ प्रस्ताव के विपरीत चिह्नित जगह पर किसी भी प्रकार का निर्माण करवाने के लिए रोक लगा चुके हैं।
- नहरी पानी आपूर्ति के लिए ये है योजना
जनस्वास्थ्य विभाग ने डार्क जोन के जिन 35 गांवों में नहरी पानी आपूर्ति की जो योजना तैयार की है उसके तहत एक बड़ा जलघर बनाया जाना है। इन गांवों में एक-एक बूस्टर भी बनेगा। इसके अलावा पांच इंटरमीडिएट पंपिंग सिस्टम का निर्माण भी योजना का हिस्सा है। हब जलघर से पानी का उठान कर बूस्टिंग स्टेशन के जरिये गांवों में आपूर्ति की जाएगी।
- यूं बिछनी हैं पाइप लाइनें
योजना अनुसार सभी गांवों में नहरी पानी आपूर्ति के लिए पेयजल लाइनें डाली जानी हैं। 125786 मीटर लंबी चार इंची, 70117 मीटर लंबी छह इंची, 27875 मीटर लंबी आठ इंची, 16650 मीटर लंबी 10 इंची, 12890 मीटर लंबी 12 इंची और 5000 मीटर लंबी 28 इंची पाइप लाइन प्रोजेक्ट के तहत डाली जानी है।
- इन गांवों को मिलना है लाभ
बाढड़ा, भांडवा, बिलावल, चांदवास, धनासरी, हंसावास कलां, हंसावास खुर्द, हुई, जेवली, कांहड़ा, किष्कंधा, लाड, मांढी हरिया, मांढी केहर, मांढी पिरानू, नांधा, नीमड़-बड़ेसरा, रहड़तोदा, रहड़ोदी, बड़राई, गोपालवास, कुब्जागनर, माई कलां, नौरंगाबास जाटान, पिचौपा कलां व पिचोपा खुर्द समेत 35 गांवों को इस प्रोजेक्ट का लाभ मिलना है।
ग्रामीणों की समस्या और मांग पर हमने सरकार से यह प्रोजेक्ट मंजूर करवाया था। इसमें फिलहाल जमीनी अड़चन आड़े आई हुई है। जल्द ही इस योजना को सिरे चढ़वाने का हमारा प्रयास रहेगा।
नैना चौटाला, विधायक, बाढड़ा
चांदवास में जलघर निर्माण का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाकर गांवों में नहरी पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाए।
दलबीर दलाल, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग