चरखी दादरी। शहर को स्वच्छ बनाने और दूषित पानी निकासी के बेहतर प्रबंधन के लिए नवंबर में डीसी मनदीप कौर के निर्देश पर नालों की सफाई का काम शुरू करवाया गया। अब अतिक्रमण के चलते नालों की सफाई का काम अटका हुआ है। इसके चलते डीसी की स्वच्छता मुहिम को झटका लगा है। दूसरी ओर नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का तर्क है कि शहर के नालों को वे नगर परिषद के सुपुर्द कर चुके हैं। नालों की सफाई नगर परिषद करवा रही है और अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी भी उनकी है। दूसरी ओर नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि लिखित में नाले उन्हें सुपुर्द नहीं किए गए हैं और जब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं होगी तब तक मालिकाना हक पीडब्ल्यूडी का रहेगा। नगर परिषद अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण के चलते नालों की सफाई का काम अटका हुआ है और इसके लिए वे पीडब्ल्यूडी से पत्राचार भी कर चुके हैं।
शहर को अतिक्रमण मुक्त करना डीसी मनदीप कौर ने प्राथमिकता बताई है। उनकी योजना अनुसार दूसरे चरण में सभी नालों की सफाई करवाई जानी है। नवंबर में नगर परिषद ने नालों की सफाई का काम शुरू करवाया था। इसके तहत शहर में करीब 10 किलोमीटर लंबे नालाें की सफाई करवाई जानी थी। एजेंसी ने टीम भेजकर 80 प्रतिशत काम पूरी कर लिया है।
कई ऐसी जगह हैं जहां नालों पर अतिक्रमण है और वहां से अतिक्रमण हटने के बाद ही सफाई संभव है। अतिक्रमण हटने के इंतजार में एजेंसी वहां सफाई कार्य नहीं कर पा रही है। वहीं, पीडब्ल्यूडी और नगर परिषद का आपसी तालमेल न होने से नालों की सफाई में देरी हो रही है और इसका खामियाजा आमजन को भुगतान पड़ रहा है।
18 लाख रुपये से होनी है सफाई
नगर परिषद ने शहर के भगवान परशुराम चौक से लोहारू रोड के दोनों तरफ के करीब 5 किलोमीटर लंबे नाले, परशुराम चौक से रोहतक रेलवे फाटक तक 1 किलोमीटर लंबा नाला, रोहतक रोड रेलवे फाटक से चंपापुरी के दोनों तरफ के नालों के अलावा घिकाड़ा रोड स्थित 1 किलोमीटर लंबा नाला साफ करवाया जाना है। इस काम करीब 18 लाख रुपये लागत आएगी और ये कार्य टेंडर के जरिये करवाया जा रहा है।
गंदगी की भरमार, एजेंसी को करनी पड़ी मशक्कत
दरअसल, नालों के ऊपर डाले गए स्लैब के अलावा कई दुकानदारों ने पक्के चबूतरे तक बनाए हुए थे। इन चबूतरों को भी एजेंसी की ओर से जेसीबी की मदद से तोड़ा गया। इसके बाद नालों की सफाई की गई। सालों से सुध न लेने के चलते नालों में गंदगी की भरमार मिली। इसके चलते एजेंसी को मशक्कत करनी पड़ी।
कहीं रखे खोखे तो कहीं तीन फुट नीचे दबे नाले
एजेंसी प्रतिनिधि की मानें तो शहर के लोहारू चौक व रोहतक रोड स्थित चंपापुरी क्षेत्र में लोगों ने कहीं नालों पर सीमेंट की स्लैब बना रखी है तो कहीं नाला के ऊपर तीन फुट तक मिट्टी डालकर लोहे की टीन से बने खोखे रखे हुए हैं। जब तक अतिक्रमण नहीं हटेगा तब तक काम आगे नहीं बढ़ पाएगा। जब तक बाकी बचा 20 फीसदी काम पूरा नहीं होगा, तब तक 80 प्रतिशत की सफाई का असर भी नजर नहीं आएगा।
अतिक्रमण की वजह से कुछ जगहों पर नालों की सफाई का काम रुका हुआ है। नगर परिषद अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी ई है। अतिक्रमण हटते ही उक्त जगहों पर नालों की सफाई करवा दी जागी।
प्रदीप वशिष्ठ, एजेंसी प्रतिनिधि
पीडब्ल्यूडी और नगर परिषद के अधिकारी आमने- सामने
अगर नाले नगर परिषद को सौंपने के पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के पास कोई सबूत हैं तो वो पेश करे। जब तक लिखित प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक मालिकाना हक पीडब्ल्यूडी का रहेगा। अतिक्रमण हटवाने के लिए पीडब्ल्यूडी को लिख चुके हैं। हम संयुक्त निरीक्षण के लिए भी तैयार हैं। - मुकेश कुमार, एमई, नगर परिषद
शहर के नाले नगर परिषद को सुपुर्द कर रखे हैं। इनमें सफाई कार्य भी नगर परिषद की ओर से करवाया जा रहा है। नालों पर अतिक्रमण की समस्या है तो नगर परिषद के अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं। - अश्वनी भारद्वाज, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी