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Charkhi Dadri: सेना भर्ती के नाम पर युवक से ठगे साढ़े 3 लाख रुपये, फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी थमाया

Thu, 03 Nov 2022 11:10 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)

सार

शिकायतकर्ता के अनुसार उसने दो लाख रुपये शुरुआत में दिए और इसके बाद डेढ़ लाख रुपये मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद और ढाई लाख रुपये ज्वाइनिंग के बाद मांगे गए। इसके बाद वो अपने रिश्तेदार नीरज के साथ बिहार गया अैर वहां दो लोगों ने उसका फार्म भरवाकर मेडिकल कराया।
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Fraud - फोटो : Istock
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विस्तार
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सेना भर्ती के नाम पर राजस्थान के झुंझनू जिला निवासी एक युवक से साढ़े तीन लाख की ठगी का मामला सामने आया है। ठग गिरोह बिहार का बताया जा रहा है और शिकायतकर्ता एक रिश्तेदार की बदौलत उनके संपर्क में आया। अब पीड़ित अमन ने दादरी सदर थाना पुलिस को इस संबंध में शिकायत सौंपी है क्योंकि रुपये का लेन-देन थाना क्षेत्र के गांव समसपुर में हुआ था। पुलिस ने इस संबंध में चार आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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पुलिस को दी शिकायत में झुंझनू के गांव भालोट निवासी अमन ने बताया कि वो चरखी दादरी के मानकावास क्रशर जोन में मशीनों की देखभाल करता है। उनकी समसपुर गांव में रिश्तेदारी है। दो जुलाई 2021 को वो अपने रिश्तेदार नीरज के घर गया हुआ था। उस दौरान नीरज ने बताया कि उसकी पहचान दो-तीन ऐसे लोगों से है जो रुपये लेकर सरकारी नौकरी लगवाते हैं। उनसे बात करके तुझे भी नौकरी लगवा सकता हूं।

शिकायतकर्ता के अनुसार उसके रिश्तेदार नीरज ने बताया कि उसकी पटना निवासी सुनील से बात हुई है। सुनील ने बताया है कि आर्मी कैंट दानापुर (बिहार) में एमईएस की भर्ती चल रही है। वो 6 लाख रुपये में आर्मी में जनरल ड्यूटी सिपाही या क्लर्क भर्ती करवा सकता है। एमईएस में 8 लाख रुपये में स्टोरकीपर या क्लर्क भर्ती कराने की बात उसे बताई गई।
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जीडी पद का थमाया फर्जी ज्वाइनिंग लेटर
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने दो लाख रुपये शुरुआत में दिए और इसके बाद डेढ़ लाख रुपये मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद और ढाई लाख रुपये ज्वाइनिंग के बाद मांगे गए। इसके बाद वो अपने रिश्तेदार नीरज के साथ बिहार गया अैर वहां दो लोगों ने उसका फार्म भरवाकर मेडिकल कराया। उसके बाद नीरज के फोन पर मेरिट लिस्ट भेजी जिसमें उसका नाम था। उसी दौरान उससे डेढ़ लाख रुपये लिए गए और इसके बाद उसे ज्वाइनिंग लेटर थमाया गया जिसमें कमांडेट दानापुर की मुहर लगी थी। यह लेट फर्जी था इसके बाद पता उसे बाद में पता चला।

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