चरखी दादरी में प्रेम विवाह के बाद सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहे मंदौला और रामलवास निवासी दो परिवारों को पांच साल बाद कोर्ट से न्याय मिला है। एसीजेएम रामअवतार पारिक की कोर्ट ने इस मामले में 36 लोगों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के 40 दिन बाद झोझूकलां थाना पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वहीं, याची पक्ष ने चार पुलिस कर्मचारियों पर भी ड्यूटी का सही से निर्वहन न करने का आरोप लगाया था और कोर्ट ने इसकी जांच करने का भी आदेश दिया है।
दरअसल मंदौला निवासी एक युवक ने रामलवास निवासी एक युवती से अगस्त 2018 में प्रेम विवाह किया था। दोनों परिवार के गोत्र तो अलग थे लेकिन दोनों गांव सांगवान खाप के अधीन थे। युवक-युवती के परिजनों ने शादी पर सहमति जताते हुए मंदौला में 22 सितंबर 2018 को समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया था। इससे ठीक एक दिन पहले कुछ लोग उनके घर आ गए और शादी तोड़ने की बात कही।
उनके मना करने पर 23 सितंबर को पहले रामलवास में और फिर मंदौला में पंचायत की गई। दोनों जगह आयोजित पंचायत में दोनों परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का फरमान सुनाया गया। इसके बाद इस मामले को लेकर युवती की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की गई।
गत 10 अगस्त को एसीजेएम रामअवतार पारिक की कोर्ट ने झोझूकलां थाना पुलिस को इस संबंध में 36 नामजद लोगों पर केस दर्ज करने का आदेश दिया था। झोझूकलां थाना पुलिस ने 20 सितंबर को इस संबंध में 36 लोगों के खिलाफ धारा 141, 143, 452, 503 व 506 के तहत केस दर्ज कर लिया।
इन लोगों पर दर्ज हुआ केस
झोझूकलां थाना पुलिस ने इस संबंध में सूरजभान, संजीव, प्रदीप, नीलम, सुरेंद्र, टेकचंद, संजय, सुरेंद्र सिंह, अजय राज सिंह, रामकुमार, प्रीतम, समेर, सुरेंद्र, प्रदीप, गुलजारी, सोमेश, शमशेर सिंह, शमशेर, हवासिंह, हुक्म, चंद्र, रोहताश, महीपाल, रणसिंह, सुरेंद्र, देवेंद्र, गुणवंती, ईश्वर पहलवान, अमित, ऋषिपाल, देवी सिंह, रामसिंह, अजीत, सुरेंद्र व प्रमेंद्र पर केस दर्ज किया है।
दोषी मिलने पर इन चार पुलिस कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई
याची पक्ष ने कोर्ट में दायर याचिका में चार पुलिस कर्मचारियों पर भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। इनमें तत्कालीन एसएचओ जगराम, एएसआई पवन व राकेश और तत्कालीन इंस्पेक्टर एवं महिला हेल्पलाइन इंचार्ज मनीषा के नाम शामिल हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगर इन्होंने ड्यूटी में लापरवाही बरती है तो उनके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत अलग से एफआईआर दर्ज की जाए।