लापरवाही के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले पुलिस व चिकित्सकों ने मंगलवार को हरियाणा के चरखी दादरी में कर्तव्य निष्ठता और इंसानियत की नजीर पेश की है। शहर के हरि नगर निवासी 21 वर्षीय एक युवती ने मंगलवार सुबह घर पर संदिग्ध परिस्थितियों में फंदा लगा लिया।
सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी इस समय करीब 800 है। मातृ-शिशु अस्पताल की ओपीडी भी 150 से पार है। वहीं, जिले में तीन सीएचसी हैं और एक सीएचसी की दैनिक ओपीडी इस समय 90 तक पहुंची हुई है। जिले में 12 पीएचसी भी हैं और एक पीएचसी की दैनिक ओपीडी 40 से पार रहती है। इस प्रकार से जिले में अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर दो हजार की ओपीडी प्रभावित होने का अनुमान है।
4, 9, 13 और 20 साल पर एससीपी दी जाए। स्पेशल कैडर और सीधे एसएमओ की भर्ती पर रोक लगे। चिकित्सकों का कहना है कि ये तीन मांगें पूरी होने पर ज्यादा से ज्यादा चिकित्सक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं देंगे।
केस-1 : शहर के वार्ड-9 निवासी मनीष ने बताया कि मंगलवार सुबह अपने दोनों बेटों की तबीयत खराब होने पर वो 10:45 पर वह अस्पताल पहुंचा था। ओपीडी देखने वाला कोई चिकित्सक नहीं मिला। एक बेटे को खांसी की शिकायत दी थी तो दूसरे को चक्कर आने की। डॉक्टर्स न मिलने के कारण अब निजी अस्पताल में जाकर उपचार करवाना पड़ेगा।
केस-2 : खुडाना निवासी सतीश ने बताया कि वो अपनी पत्नी को उपचार के लिए दादरी सिविल अस्पताल लाया था। चिकित्सकों की हड़ताल की उसे जानकारी नहीं थी और अस्पताल पहुंचने पर यह बात उसे पता चली। उसने बताया कि पत्नी की डिलिवरी होनी है और उसे चिकित्सक के पास दिखाने के लिए दादरी सिविल अस्पताल लाया था और निजी अस्पताल लेकर जाऊंगा।
इमरजेंसी केस आने पर चिकित्सकों ने मरीज का उपचार भी किया है। जिले के सभी सरकारी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। अगर सरकार दो दिन में मांगें पूरी नहीं करती है तो 14 जनवरी से चिकित्सक पूर्णतया हड़ताल कर देंगे। - डॉ. आशीष मान, एचसीएमएस, महासचिव