जिला बनने के 7 साल 10 माह बाद भी दादरी सिविल अस्पताल में विभाग शुरू नहीं कर पाया ब्लड बैंक, भिवानी और रोहतक पीजीआई की भागदौड़ करने के लिए विवश तीमारदार
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। सिविल अस्पताल में 500 यूनिट भंडारण क्षमता का ब्लड बैंक अब तक शुरू नहीं हो पाया है। पिछले दो साल से ब्लड बैंक के निर्माण की कवायद जारी है। लेकिन, अब तक मरीजों को सुविधा का लाभ धरातल पर नहीं मिल पाया है। वहीं, जिला स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि ब्लड बैंक का ढांचा बनकर तैयार है। मशीनें भी स्थापित की जा चुकी हैं। प्रदेशस्तरीय टीम की निरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही ब्लड बैंक शुरू करने का रास्ता साफ होगा।
बता दें कि दादरी को जिला बने 7 साल 10 माह हो चुके हैं। सिविल अस्पताल में 500 यूनिट भंडारण क्षमता के ब्लड बैंक का ढांचा तैयार करने पर 19 लाख रुपये की लागत आई है। स्वास्थ्य विभाग ने करीब एक साल पहले ब्लड बैंक की मशीनें मंगवाकर छह माह पहले स्थापित भी करवा दिया है। वहीं, ब्लड बैंक शुरू करने के लिए विभाग आवेदन कर चुका है।
अब प्रदेश से टीम को यहां निरीक्षण करने आना है। निरीक्षण के दौरान टीम यहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेगी और उसके बाद अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। अगर व्यवस्थाएं सही मिलीं तो कुछ दिनों के अंदर ही सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक शुरू हो जाएगा।
दरअसल, दादरी जिला रक्त के मामले में अभी पूर्णतया भिवानी पर निर्भर है। सिविल अस्पताल में भिवानी से ही रक्त की पूर्ति की जा रही है। इसके लिए हर दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम गाड़ी लेकर जाती है। इस झंझट को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक अस्पताल में ब्लड बैंक खोलने की योजना तैयार की थी।पहले यह योजना कोरोना की भेंट चढ़ी रही। लंबे इंतजार के बाद सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक शुरू करने के लिए ढांचा तैयार करवाया गया। अब टीम के आने का इंतजार है।
पुराने भवन के दो कमरों में बनाया ब्लड बैंक
ब्लड बैंक निर्माण के लिए सिविल अस्पताल में दो कमरों का चयन किया गया। यह चयन पीडब्ल्यूडी और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने किया था। इस समय अस्पताल के पुराने भवन में ब्लड यूनिट की क्षमता अधिकतम 30 यूनिट की है। कई दफा ब्लड खत्म होने की स्थिति में मरीज के तीमारदारों को खुद ब्लड बैंक जाकर खून लाना पड़ता है। ब्लड बैंक बनने के बाद मरीजों के लिए जिलावासियों को सिविल अस्पताल में ही रक्त मिल जाएगा।
- हर साल आठ से दस हजार यूनिट होता है जिले में रक्तदान
हर साल जिले में डेढ़ सौ से अधिक रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं, जिनमें ज्यादातर युवा ही रक्तदान करते हैं। एक साल में जिला औसतन आठ से हजार यूनिट रक्तदान करता है। सोनीपत, भिवानी, महेंद्रगढ़, रोहतक, गुरुग्राम, नई दिल्ली, रेवाड़ी आदि जिलों की ब्लड बैंक टीमें दादरी में आकर रक्तदान करवाती हैं।
वर्सन:
ब्लड बैंक शुरू होने से पहले टीम निरीक्षण करने आएगी। इसके लिए हम पत्राचार कर चुके हैं। टीम की निरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही ब्लड बैंक खोलने की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
-डॉ. आशीष मान, डिप्टी सीएमओ, चरखी दादरी
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चरखी दादरी सिविल अस्पताल, जहां ब्लड बैंक का ढांचा तैयार किया गया है। संवाद