संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। पटवारियों और कानूनगो की हड़ताल जारी है। इसके चलते जहां आमजन के विभिन्न प्रकार के काम रुके हुए हैं, तो वहीं जेल में बंद कैदी और बंदियों की जमानत व पैरोल भी अटकी हुई है। हड़ताल के चलते पिछले 16 दिन के दौरान लगभग 3000 जमाबंदी रिपोर्ट, 2 हजार इंतकाल, 5 हजार रिहायशी प्रमाण पत्र, जमाबंदी रिपोर्ट के अलावा करीब 40 बंदियों की जमानत रिपोर्ट सत्यापन न होने के कारण रुकी हुई है। एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि हड़ताल के चलते प्रतिदिन सरकार को 30 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन पिछले 16 दिनों से लघु सचिवालय के बाहर मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं। हड़ताल के चलते जमीन संबंधी कार्य करवाने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा बंदियों की जमानत रिपोर्ट भी तैयार नहीं हो पा रही है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानेगी, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
बंदी की जमानत में पटवारी करता है सत्यापन
जेलों में बंद कैदियों व बंदियों की जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों का सत्यापन करवाना होता है। हलका पटवारी भी अपने क्षेत्र के बंदी को जमानत दिलवाने में अहम भूमिका निभाता है। जमानत मंजूर होने के बाद संबंधित हलका पटवारी के पास डाक द्वारा लेटर जारी कर बंदी की रिपोर्ट बनवाई जाती है, ताकि हलका पटवारी बंदी की चल-अचल संपत्ति सहित चाल चलन रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप सके।
पिछले 16 दिनों से जिले के 49 पटवारी और 10 काननूगो कलम छोड़ हड़ताल पर हैं। ऐसे में कार्यालय में आई जमानत रिपोर्ट को पटवारियों ने अभी तक हाथ भी नहीं लगाया है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही जेल में बंद कैदी व बंदी जमानत पर बाहर आ सकेंगे। ऐसे करीब 40 केस होने का अनुमान है। - कुलबीर सांगवान, जिला प्रधान, पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन
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लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन के सदस्य। संवाद