चरखी दादरी। राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की प्रतिदिन की हाजिरी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने के बाद उपस्थिति में 15 प्रतिशत तक सुधार आया है। अब जो भी विद्यार्थी स्कूल से अनुपस्थिति रहता है संबंधित कक्षा प्रभारी अभिभावक को फोन कर इसकी सूचना देते हैं। इससे अब अभिभावकों के रवैये में भी धीरे-धीरे सुधार आने लगा है। अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को 75 प्रतिशत से कम हाजिरी होने पर सरकार की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति का भी डर सताने लगा है। ऐसे विद्यार्थी अब नियमित स्कूल आने लगे हैं।
जिले के स्कूलों में विद्यार्थी उपस्थिति की औसत पहले अधिकतम 60 से 70 प्रतिशत तक रहती थी। पहले शिक्षक रजिस्टर में हाजिरी लगाते थे जिससे तकरीबन विद्यार्थियों की हाजिरी जैसे-तैसे पूरी कर दी जाती थी। वहीं, शिक्षा विभाग का नियम है कि अगर विद्यार्थी स्कूल से लगातार छह दिन गैर हाजिर हो जाता है तो उसका रिकाॅर्ड से नाम कट जाएगा। छात्राओं के लिए यह नियम 10 दिन गैरहाजिरी का है। स्कूलों में इस समय प्रतिदिन ऑनलाइन हाजिरी पोर्टल पर भेजी जा रही है।
राजकीय स्कूल सारंगपुर के प्राचार्य दर्शन सिंह ने बताया कि जो विद्यार्थी जान-बूझकर स्कूल नहीं आते थे वे अब नियमित हो गए हैं। इससे परीक्षा परिणाम में भी सुधार आने की उम्मीद है। जब विद्यार्थी कक्षा नियमित रूप से लगाएंगे तो उनकी शैक्षिक कमजोरी भी दूर होगी। हाजिरी 100 फीसदी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक भी सजग हो गए हैं। जिस दिन विद्यार्थी अनुपस्थित रहता है उसी दिन शिक्षक अभिभावक को फोन कर इसकी सूचना देने लगे हैं। इससे दैनिक उपस्थिति में 15 प्रतिशत तक सुधार आया है। शिक्षकों को अभिभावकों से समय-समय पर संवाद भी कायम रखना होगा।
ऑफलाइन हाजिरी के दौरान राजकीय स्कूलों में छात्र उपस्थिति का आंकड़ा कम ही रहता था। अब ऑनलाइन होने से दैनिक हाजिरी का आंकड़ा बढ़ा है। शिक्षक अपने स्तर पर छात्रों की उपस्थिति दर बढ़ाने का प्रयास करने लगे हैं। दैनिक उपस्थिति में 15 प्रतिशत तक सुधार आया है। अभिभावकों को फोन कर सूचित किया जा रहा है।
संजय शास्त्री, जिला अध्यक्ष, हरियाणा विद्यालय राजकीय अध्यापक संघ
विभाग का ऑनलाइन हाजिरी भेजने का निर्णय सही है इससे विद्यार्थी कक्षा में नियमित रहने लगे हैं। इससे परिणाम में भी सुधार आने की उम्मीद है। शिक्षक भी विद्यार्थी के अनुपस्थित रहने पर अभिभावकों को फोन कर सूचना दे रहे हैं। ऑनलाइन हाजिरी से 15 प्रतिशत तक सुधार आया है। इसके लिए शिक्षकों को और बेहतर प्रयास करने चाहिए।
नवीन नारा, डीईईओ, शिक्षा विभाग