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Charkhi Dadri News: कबड्डी खिलाड़ी प्रियंका और नितेश का एशियन गेम्स सफर रहा स्वर्णिम

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चरखी दादरी। भारतीय महिला और पुरुष कबड्डी टीम के लिए एशियन गेम्स का सफर सुनहरा रहा। महिला टीम ने चीनी ताईपे को तो पुरुष टीम ने ईरान की टीम को हराकर फाइनल जीता। आदमपुर डाढ़ी निवासी प्रियंका पिलानिया महिला टीम का तो उनके गांव के ही नितेश पुरुष टीम का हिस्सा रहे। आदमपुर के दोनों होनहारों ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़ी।
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आदमपुर डाढ़ी निवासी प्रियंका पिलानिया वरिष्ठ महिला कबड्डी खिलाड़ियों में से एक है और उन्हें बड़ी स्पर्धाओं का पुराना अनुभव है जिसका टीम को काफी फायदा भी मिला। प्रियंका पिलानिया भारतीय महिला टीम में शामिल वरिष्ठ खिलाड़ियों में से एक है। बता दें कि शनिवार सुबह एशियाई गेम्स में महिला कबड्डी टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला भारत और चीनी ताइपे के बीच हुआ। पहले हाफ तक भारतीय टीम ने 14-9 की मजबूत पकड़ बनाए रखी। पहले हाफ के बाद स्कोर में चीनी ताइपे ने भारतीय टीम को पछाड़कर 19-21 की बढ़त बना ली। इसके बाद भारतीय टीम अपने चिर-परिचित अंदाज में नजर आई और मैच का दूसरा हाफ पूरा होने तक स्कोर 26-25 कर स्वर्ण पदक और एशियाई खेलों का 100वां पदक अपने नाम किया।
दरअसल, गीता, बबीता और विनेश फौगाट का दादरी जिले समेत प्रदेश और देश में महिला कुश्ती को बढ़ावा देने में योगदान है तो महिला कबड्डी में आदमपुर निवासी प्रियंका और उनकी बहन पिंकी पिलानियां भी ये ही भूमिका निभा चुकी हैं। कबड्डी में दोनों बहनों की सफलता के बाद गांव की अन्य बेटियां भी इस खेल में आगे आई हैं। प्रियंका ज्यादातर बड़े टूर्नामेंट में भारतीय कबड्डी टीम का हिस्सा रही हैं और उन्हें काफी अनुभवी खिलाड़ी माना जाता है।
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- वर्ष 2012 में जिताया था वर्ल्डकप
प्रियंका पिलानियां वर्ष 2012 में कबड्डी वर्ल्डकप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं। इसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स में देश को तीन स्वर्ण और एक रजत पदक दिलाया है। प्रियंका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 से अधिक पदक जीत चुकी है।

- मिट्टी के मैदान से तय किया मैट तक का सफर
प्रियंका पिलानियां ने कबड्डी खेलना जब शुरू किया तो संसाधनों का काफी अभाव था जबकि इसे पुरुषों का खेल माना जाता था। शुरुआत में तो प्रियंका ने मिट्टी के मैदान में लड़कों के साथ कबड्डी खेली। उस दौरान की गई कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर मैट तक का सफर प्रियंका तय कर पाई है। ग्रामीण भी उनके हौसले और दृढ़ निश्चय की तारीफ करते हैं। वहीं, भारत की पुरुष कबड्डी टीम का हिस्सा रहे नितेश ने भी इस मुकाम तक पहुंचने में काफी मेहनत की है। पुरुष टीम ने ईरान पर 41-32 के अंतर से जीत दर्ज की।
मुक्के रहे कमजोर तो नहीं पा सके लक्ष्य

लक्ष्य ने नहीं दिखा पाए मुक्को का दम

घसोला निवासी एवं सेना का जवान लक्ष्य कुमार भी एशियन गेम्स में भाग लेने पहुंची मुक्केबाजों की 13 सदस्यीय दल में शामिल थे। वो स्पर्धा में अपने मुक्कों का दमखम नहीं दिखा पाए। उन्हें ओमुरबेक बेक्झिगिट उलू से 4-1 से हार मिली, जिसके चलते वो क्वालीफाई भी नहीं कर पाए।
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