प्रदेश में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के खाली पड़े 160 पदों पर सीधी भर्ती के खिलाफ हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (एचसीएमएसए) विरोध में उतर आई है। इसी कड़ी में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग में तैनात चिकित्सकों ने ओपीडी व इमरजेंसी में काले बिल्ले लगाकर मरीजों का उपचार किया और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करवाया।
चिकित्सकों का कहना है कि एसएमओ के पद पर सीधी भर्ती के बजाय मौजूदा चिकित्सा अधिकारियों को पदोन्नत कर भरा जाए। चिकित्सकों के विरोध के दौरान किसी भी प्रकार से स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं हुई।
चिकित्सकों ने कहा कि सरकार की ओर से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) के 160 पदों को डायरेक्ट भर्ती के माध्यम से भरने का फैसला पूरी तरह अनुचित और डॉक्टरों के भविष्य के साथ अन्याय है। वर्तमान व्यवस्था में एक डॉक्टर को 15 से 16 वर्षों की सेवा के बाद एसएमओ के पद पर प्रमोशन मिल पाता है, जबकि एसएमओ की सीधी भर्ती होने के कारण यह अवधि बढ़कर 23 से 24 साल तक चली जाएगी। इससे न केवल चिकित्सकों का मनोबल टूटेगा बल्कि प्रमोशन की उम्मीद रखने वाले कई अनुभवी डॉक्टर कभी एसएमओ नहीं बन पाएंगे।
आज सीएमओ को सौंपेंगे मांगपत्र
चिकित्सकों ने बताया कि बुधवार को एसोसिएशन के सदस्य चिकित्सक सामूहिक रूप से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को अपना मांगपत्र सौंपेंगे और गुरुवार को प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य विभाग महानिदेशक से मुलाकात करेंगे। वे चाहते हैं कि सरकार इस निर्णय को तत्काल वापस ले और पदों को पूर्व व्यवस्था के अनुसार प्रमोशन के आधार पर भरे।
पुरानी मांगें भी अधर में
एसोसिएशन के दादरी जिला अध्यक्ष डॉ. राजीव बेनीवाल ने बताया कि काफी समय पहले मोडिफाई एसीपी को भी मंजूरी मिल चुकी है लेकिन अभी तक उसे लागू नहीं किया गया है। नई एसीपी लागू होने से चिकित्सकों का वेतन बढ़ेगा। जिससे नए चिकित्सक भी सरकारी सेवाओं में आने को रूचि दिखाएंगे। जिसका मरीजों को लाभ मिलेगा।
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मरीजों की सेवा सर्वोपरि है इसलिए किसी भी तरह की स्वास्थ्य सेवा बाधित नहीं की जाएगी। शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे। सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे ताकि ज्यादा से ज्यादा अनुभवी चिकित्सक सरकारी सेवाओं में आएं।
- डॉ. राजीव बेनीवाल, प्रधान, (एचसीएमएसए)