टिकान कलां की सीमा में वो खेत दिखाता किसान जहां हवाई जहाज गिरा था। संवाद
चरखी दादरी। अहमदाबाद विमान हादसे ने साढ़े 28 साल पहले चरखी दादरी में हुए विमान हादसे की यादें ताजा कर दीं। टिकान कलां, ढाणी फोगाट, पातुवास, खेड़ी और महराणा गांव के सैकड़ों लोग 12 नवंबर 1996 को हुए हादसे के प्रत्यक्षदर्शी हैं। उनके जहन में आज भी उस हादसे की यादें हैं।
टिकान कलां के पूर्व सरपंच महासिंह, महताब और नंबरदार देवेंद्र की मानें तो उस दौरान टिकान कलां के खेतों से हवाई जहाज का मलबा और मृतकों के अंग उठाने में करीब दस दिन का समय लग गया था। इतना ही नहीं, हादसे के तीन दिन बाद तक खेत से धुआं उठता रहा था। जबकि दादरी, भिवानी, झज्जर और महेंद्रगढ़ से पहुंचीं दमकल विभाग की गाड़ियों में पानी तक कम पड़ गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के आने के बाद प्रशासन और आर्मी ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया था।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1996 में जहां हवाई जहाज गिरा था, उससे दो किलोमीटर की परिधि में टिकान कलां के अलावा, ढाणी फोगाट, खेड़ी, महराणा और पातुवास गांव थे। बाबा जोतनाथ की कृपा रही कि पांचों गांवों के रिहायशी क्षेत्र के बजाय उस दौरान हवाई जहाज खेतों में गिर गया। अन्यथा अहमदाबाद हादसे की तरह और जनहानि हो जाती। ग्रामीणों ने बताया कि दादरी में वर्ष 1996 में हुए हादसे के बाद करीब 20 से अधिक वाहनों में दादरी अस्पताल तक शव ले जाए गए थे। संवाद