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शहर को डूबने से बचाने की जद्दोजहद में जुटा प्रशासन

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चरखी दादरी। बारिश के दौरान शहर में स्थित मेन डुंगरवाला जोहड़ लोगों की जिंदगी के लिए जी का जंजाल बन जाता है। पिछले साल बारिश के दौरान इसी जोहड़ के कारण पूरा शहर जलाशय में तब्दील हो गया था। मेन बाजारों में दो माह तक पानी भरने से दुकानदारी भी चौपट हो गई थी। यह जोहड़ मानसून में 400 एमएम तक बारिश झेल सकता है। इस बार प्रशासन शहर को डूबने से बचाने की जद्दोजहद में जुटा हुआ है। जोहड़ की साफ सफाई के लिए पानीपत से दो गोताखोर बुलाए गए हैं। दो मोटरें भी लगाई गई हैं। इन व्यवस्थाओं के सहारे शहरवासियों को इस बार मुश्किलों से बचाना है।
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प्रशासन व विभाग का इस बार ध्यान जोहड़ पर ही फोकस है। विभाग ने मानसून सीजन को देखते हुए शहर के मेन बरसाती नालों की सफाई शुरू कर दी है। अगर इसी प्रकार सीवर लाइनों को भी एक बार साफ कर दिया जाए और मेन जोहड़ों से पानी की निकासी कर उन्हें खाली कर दिया जाए, तो शहरवासियों को जलभराव से काफी हद तक राहत मिल सकती है। मेन जोहड़ 400 एमएम तक की बारिश को झेल सकते हैं। विभाग को एसटीपी के अलावा शहर से बाहर ड्राई एवं रेतीला क्षेत्र में बारिश के पानी की निकासी का भी अस्थायी तौर पर प्रबंध करने की जरूरत है, ताकि जैसे-तैसे शहर से पानी की निकासी हो सके। पिछले मानसून की बारिश का पानी नगर के साथ सीसीआई सीमेंट फैक्टरी की खाली पड़ी करीब 250 एकड़ जमीन में आज भी भरा है। प्रशासन व विभाग के पास इसका विकल्प नहीं है। लोग आए दिन धरना व प्रदर्शन करते रहे हैं। पिछले साल जिले में 563 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
सर्वप्रथम शहर की 173 किलोमीटर सीवर लाइन को जैटिंग मशीन से साफ करने की सख्त जरूरत है, ताकि तेज बारिश में सीवर लाइनें पानी के दबाव को झेल सके और शहर से पानी की निकासी हो सके। बरसाती नालों की सफाई का काम तो विभाग ने शुरू कर दिया है। अगर जल्द ही मानसून सीजन से पहले शहर की सीवर व्यवस्था को पटरी पर नहीं लाया गया तो शहर के हालात इस बार खराब होंगे। अगर विभाग व प्रशासन ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया तो बारिश के मौसम में शहरवासियों को पिछले साल की तरह मुसीबत झेलनी पड़ेगी। शहर की सीवर लाइन को दुरुस्त बनाए रखना विभाग के लिए चुनौति से कम नहीं है। समय-समय पर सीवर लाइन ब्लॉक हो रही हैं।
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= आमतौर पर शहर की सीवरेज व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते आ रहे हैं। शहर में सीवरेज के पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। सीवरेज व्यवस्था हर मौसम में ठप बनी रहती है।
= बॉक्स...
पिछले साल शहर में 1300 मीटर लंबी सीवर की नई लाइन भी बिछाई गई थी, लेकिन इससे भी सुधार नहीं आ रहा है। पुरानी सीवर लाइनें ज्यादा दिक्कतें बढ़ा रही हैं। सीवर लाइनों का नए सिरे से मास्टर प्लान तैयार कर स्थायी समाधान करने की जरूरत है। विभाग ने इस बार शहर में दोनों प्रमुख डिस्पोजल पर नई मोटरें भी लगा दी हैं, ताकि पानी का उठाने करने में बाधा नहीं आए। शहर से पानी का कम मात्रा में उठान होता रहा है।
बॉक्स...
मानसून के 30 जून तक पहुंचने की उम्मीद है। रेलवेे रोड, रोहतक रोड पर बना नाला, ढाणी रोड बरसाती नाला की मरम्मत एवं सफाई करने की जरूरत है, ताकि पानी की निकासी नियमित रूप से हो सके। मानसून के 30 जून या फिर जुलाई प्रथम सप्ताह में पहुंचने की संभावना है। सीवर लाइनों में पशु गोबर व प्लास्टिक कचरा ज्यादा बाधा बन रहा है।
इन भागों में हालात ज्यादा खराब -
शहर के तिकोना पार्क, चरखी दरवाजा, गांधीनगर कॉलोनी, पूर्ण मार्केट, रोहतक रोड, प्रेमनगर कॉलोनी, शनिदेव मंदिर वाली गली सहित विभिन्न भागों में सीवर लाइनें ज्यादा खराब बनी रहती हैं। बारिश से पहले इन सभी लाइनों की जैटिंग मशीन से सफाई करवाए जाने की जरूरत है ताकि बारिश के पानी की निकासी ठीक प्रकार से हो सके और शहर में बारिश का पानी न रुकने पाए।
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वर्जन
शहर में बरसाती नालों की सफाई का काम शुरू है। सीवर लाइनें भी मशीन से साफ कराई जा रही हैं। एसटीपी के सिस्टम को भी अपेडट किया जा रहा है।
- एसडीओ सोहनलाल, जनस्वास्थ्य विभाग।
फोटो- 01 शहर में बरसाती नालों की सफाई करते कर्मचारी।
फोटो- 02 शहर का डूंगरवाला जोहड़
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