द्रोणाचार्य अवार्डी महाबीर फौगाट का मानना है कि ओलंपिक जैसी बड़ी स्पर्धा में पदक खिलाड़ी, कोच और परिजनों के तालमेल से आता है। सरकार ने विदेशी कोच को नियुक्त कर दिए हैं और प्रदेश में खिलाड़ियों के परिजन उनकी बात तक नहीं समझ पाते, ऐसे में तालमेल संभव ही नहीं है। इस व्यवस्था में फेरबदल करते हुए सरकार को विदेशी कोच की नियुक्ति बंद करनी चाहिए। हालांकि महाबीर फौगाट ने सरकार की खेल नीतियों को सराहते हुए कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से पदक विजेता खिलाड़ियों को सबसे अधिक इनामी राशि दी जा रही है।
बजरंग की चोट बनी स्वर्ण पदक की राह में रोड़ा
महाबीर फौगाट ने अपने दामाद बजरंग पूनिया के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चोट स्वर्ण पदक की राह में रोड़ा बनी। उन्होंने बताया कि बजरंग की तैयारियां अच्छी थीं लेकिन ओलंपिक से ठीक पहले घुटने में लगी चोट का असर प्रदर्शन पर साफ दिखा। उन्होंने कहा कि चोट के बावजूद बजरंग का कांस्य पदक लाने से वो संतुष्ट हैं लेकिन अगले पदक को लेकर और जोरदार तैयारियां करनी होंगी।