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महाबीर फौगाट बोले: अनुशासनहीनता करने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों पर हो कार्रवाई, कोच की जवाबदेही भी हो तय

Wed, 11 Aug 2021 09:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)

सार

शूटर मनु भाकर के पिता का कहना है कि कोटा मिलने के दो साल बाद शूटिंग टीम का चयन किया गया। इस चयन प्रक्रिया का असर भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। उनका कहना है कि मनु को मई 2019 में ओलंपिक का कोटा मिला था, जबकि टीम का चयन मई 2021 में किया गया। इतनी लंबी समयावधि तक भी टीम चयन की स्थिति साफ न होने से खिलाड़ी तनाव में रहता है और स्पर्धा के अनुरूप तैयारियां नहीं कर पाता।
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महाबीर फौगाट। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पहलवान अपने रंग में नहीं दिखे। एक स्वर्ण समेत सात पदक देश की झोली में जरूर आए लेकिन अगर देश के पहलवान उम्मीदों पर खरा उतरते तो पदक संख्या दहाई के आंकड़े को पार कर सकती थी।

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कुश्ती में भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन कमजोर रहने का द्रोणाचार्य अवार्डी पहलवान महाबीर फौगाट ने मुख्य तीन कारण बताए हैं। उनकी सरकार से मांग है कि अगले ओलंपिक की तैयारियां अभी से शुरू करवाई जाएं लेकिन इससे पहले व्यवस्थाओं में कुछ फेरबदल किया जाए।

बीस साल के करियर में आठ अंतरराष्ट्रीय और 15 राष्ट्रीय स्तर के पहलवान देश को देने वाले महाबीर फौगाट का कहना है कि ओलंपिक या फिर अन्य किसी बड़े टूर्नामेंट के अभ्यास के लिए खिलाड़ियों को देश से बाहर न भेजा जाए।
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साई जैसे केंद्रों पर ही बेहतर माहौल के साथ इन खिलाड़ियों को अभ्यास करवाया जाए। इसके अलावा पहलवानों के लिए विदेशी कोच की नियुक्ति न की जाए। महाबीर फौगाट का कहना है कि न केवल देश के बेहतरीन पहलवान रहने वालों को कोच नियुक्त किया जाए, बल्कि उनकी जवाबदेही भी तय हो।

उनका कहना है कि पदक लाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी अभ्यास में अनुशासनहीनता करते हैं, ऐसा करने वाले खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए और उसी वेट कैटेगरी में दूसरा पहलवान तैयार किया जाए। उनका कहना है कि यह तभी संभव है जब कोच की जवाबदेही तय है।

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खिलाड़ी, कोच और परिजनों के तालमेल से आता है पदक

द्रोणाचार्य अवार्डी महाबीर फौगाट का मानना है कि ओलंपिक जैसी बड़ी स्पर्धा में पदक खिलाड़ी, कोच और परिजनों के तालमेल से आता है। सरकार ने विदेशी कोच को नियुक्त कर दिए हैं और प्रदेश में खिलाड़ियों के परिजन उनकी बात तक नहीं समझ पाते, ऐसे में तालमेल संभव ही नहीं है। इस व्यवस्था में फेरबदल करते हुए सरकार को विदेशी कोच की नियुक्ति बंद करनी चाहिए। हालांकि महाबीर फौगाट ने सरकार की खेल नीतियों को सराहते हुए कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से पदक विजेता खिलाड़ियों को सबसे अधिक इनामी राशि दी जा रही है।

बजरंग की चोट बनी स्वर्ण पदक की राह में रोड़ा
महाबीर फौगाट ने अपने दामाद बजरंग पूनिया के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चोट स्वर्ण पदक की राह में रोड़ा बनी। उन्होंने बताया कि बजरंग की तैयारियां अच्छी थीं लेकिन ओलंपिक से ठीक पहले घुटने में लगी चोट का असर प्रदर्शन पर साफ दिखा। उन्होंने कहा कि चोट के बावजूद बजरंग का कांस्य पदक लाने से वो संतुष्ट हैं लेकिन अगले पदक को लेकर और जोरदार तैयारियां करनी होंगी।
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