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उपलब्धि: खेल मैदान में जीते 200 पदक, एथलीट शर्मिला अब दौड़ा रही बस..., संघर्ष से किया मुकाम हासिल

Thu, 04 Apr 2024 10:47 PM IST
भूपेंद्र सिंह हनी सोनी, संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)

सार

एथलीट शर्मिला ने राज्य स्तर पर 21, राष्ट्रीय स्तर पर 169 और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में 10 पदक जीते हैं। अंतरराष्ट्रीय एथलीट शर्मिला अब दिल्ली की सड़कों पर डीटीसी बस भी दौड़ा रही हैं।
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नानी रामबाई के साथ पदक लेते व बस चलातीं खिलाड़ी शर्मिला सांगवान। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हरियाणा के चरखी दादरी में विषम से विषम परिस्थितियों में भी महिला अपने संघर्ष की बदौलत कोई भी मुकाम हासिल कर सकती है, बशर्ते आत्मविश्वास और लग्न हो। चरखी दादरी जिले के झोझूकलां निवासी शर्मिला सांगवान इसकी बानगी हैं।

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पति की मौत के सदमे से उभरते हुए उन्होंने न केवल परिवार को संभाला, बल्कि खेल मैदान में अपनी प्रतिभा की बदौलत 200 पदक प्राप्त किए। अंतरराष्ट्रीय एथलीट शर्मिला अब दिल्ली की सड़कों पर डीटीसी बस भी दौड़ा रही हैं।

शर्मिला सांगवान ने बताया कि डीटीसी की ट्रेनिंग पूरी होने पर मार्च में ही उन्होंने ज्वाइन किया है। एक माह से वो डीटीसी में बतौर चालक अपनी सेवाएं दे रही हैं। शर्मिला सांगवान प्रतिभावान महिला एथलीट भी हैं। वो राज्य स्तरीय स्पर्धाओं में 21, राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में 169 और अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में 10 पदक जीत चुकी हैं। वो 106 वर्षीय वयोवृद्ध खिलाड़ी रामबाई की दोहती हैं।
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12वीं पास शर्मिला फिलहाल बीएएलएलबी भी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता मांगेराम किसान हैं। वर्ष 1999 में शर्मिला की शादी झज्जर जिले के गांव खानपुर खुर्द निवासी जयसिंह से हुई थी। शादी के सात साल बाद ही उनके पति की मृत्यु हो गई। इसके बाद से वह अपने मायके रहने लगी। इस शादी से उन्हें दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी इस समय पायलेट की तैयारी कर रही है, जबकि छोटी बेटी 11वीं कक्षा में पढ़ रही है। 

वर्ष 2019 में खेल मैदान से जुड़ीं तो बदल गई जिंदगी
शर्मिला ने बताया कि साल 2019 में उन्होंने खेलने की शुरुआत की थी। खेलने की प्रेरणा भी उन्हें अपनी नानी रामबाई से मिली। वे 3 किलोमीटर व 5 किलोमीटर रेस और शॉटपुट में अपना कौशल दिखा रही हैं।शर्मिला ने बताया कि जनवरी 2024 में उन्हें डीटीसी में चालक की नौकरी मिली थी। लेकिन एथलेटिक्स कोच की ट्रेनिंग के चलते उन्होंने अब मार्च माह में नौकरी ज्वाइन की है। वे दिल्ली में दोपहर 1:30 से रात 10 बजे तक बस चलाती हैं।

पहले थामा था ट्रॉले का स्टेयरिंग
शर्मिला ने बताया कि साल 2022 में उन्होंने बुराड़ी से दो माह की ट्रेनिंग लेकर भारी वाहन चलाने का लाइसेंस बनवाया। इससे पहले उन्होंने 16 साल तक आरसीयू में भारी वाहनों की फाइल जांच आदि का कार्य किया है। उसी दौरान उन्होंने ट्रॉला चलाना सीखा।

24 घंटे में 1490 किलोमीटर की दूरी तय कर बनाया था रिकॉर्ड
शर्मिला ने पिछले साल 1489.4 किलोमीटर की दूरी को 24 घंटे में तय कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने बताया 22 टायरी ट्रॉला को पानीपत से बीकानेर और बीकानेर से फतेहाबाद तक और वापस इसी रास्ते पानीपत पहुंचाया था। उन्होंने बताया कि यह दूरी 27 घंटे में तय होने का रिकॉर्ड था, लेकिन उन्होंने 24 घंटे में दूरी तय कर डाली।

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