तहसील कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन करते हुए अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी।
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बाढड़ा। दिल्ली के जंतर- मंतर पर विरोध प्रकट कर रहे छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज के खिलाफ बाढड़ा अधिवक्ता संघ, नंबरदार एसोसिएशन व ने तहसील कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
संघ के सदस्यों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने की स्वतंत्रता मिले। छात्रों पर बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। अधिवक्ता संघ की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि देश का युवा वर्ग अपनी समस्याओं और मांगों के लिए शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठा रहा है। ऐसे में उनके साथ संवाद स्थापित करने के बजाय बल प्रयोग किया जाना लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है।
अधिवक्ता संघ अध्यक्ष संजीव श्योराण ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकारें शांतिप्रिय व पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं करवाने में पूर्णतया नाकाम हो रही हैं जिससे प्रतिभाओं को आत्महत्या करनी पड़ रही है। संजीव श्योराण ने कहा कि लोकतंत्र में दमनात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवा पीढ़ी के हाथों में है। छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान निकालना सरकार की जिम्मेदारी है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि जंतर-मंतर पर हुई घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इस दौरान अधिवक्ता अनिल मान, अशोक श्योराण, जगत सिंह दगड़ौली, श्रीराम, अमरदीप, अमित आर्य, राकेश कुमार, मास्टर विनोद, संदीप आदि मौजूद रहे।