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Charkhi Dadri News: 19 एमएएम बारिश से 67 हजार किसानों को हुआ फायदा, लाखों लीटर डीजल बचा

Sun, 03 Dec 2023 10:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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चरखी दादरी। मौजूदा रबी सीजन में जिले में 28 से 30 नवंबर के बीच 19 एमएम बारिश होने से 67 हजार किसानों को करीब छह करोड़ रुपये की बचत हुई है। बारिश से किसानों की कहीं एक तो किसी क्षेत्र में दो सिंचाई की बचत हुई है। जिससे लाखों लीटर डीजल व अन्य ईंधन बचा है, साथ ही पर्यावरण को भी काफी फायदा हुआ है।
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बता दें कि जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर क्षेत्र है। क्षेत्र में इस बार सरसों का रकबा सबसे ज्यादा एक लाख 55 हजार एकड़ क्षेत्र है। गेहूं का रकबा 90 हजार एकड़ है। जिले में रबी की फसलों के रूप में अधिकतर किसान सरसों, जौ, गेहूं, चना, मेथी, गन्ना, जई, बरसीम आदि की बिजाई करते हैं। किसानों ने इस बार रबी की सभी प्रकार की फसलों की बिजाई अक्तूबर-नवंबर माह में समय पर ही कर दी थी।

रेतीले क्षेत्र में एक सिंचाई की बचत
जिले का बाढड़ा एरिया रेतीला है। बारिश होने से इस बार एक सिंचाई की बचत हुई है। इस एरिया में बिजली चालित ट्यूबवेल से सिंचाई की जाती है। इन किसानों को फव्वारा सिस्टम से सिंचाई करनी पड़ती है। चरखी दादरी ब्लॉक के एरिया में नहरें भी गुजरती हैं लेकिन नहरी पानी की जिले में सदैव कमी ही बनी रहती है। नहरों पर सरकारी मोगों की संख्या भी काफी कम है, जिससे सिंचाई की व्यवस्था नहीं बन पाती। इस वजह से किसान नहरी पानी की चोरी करने को विवश होते रहे हैं। किसान नहरों पर इंजन व ट्रैक्टर मशीन आदि लगाकर पानी का उठान करते रहे हैं। वैसे भी सर्दी में पहाड़ों पर बर्फ जमने से नदियों में पानी की मात्रा कम होती है। इस मौसम में किसानों को सिंचाई के लिए नहरी पानी भी कम ही मात्रा में मिल पाता है। ऐसे में नवंबर माह में हुई 19 एमएम बारिश के रूप में किसानों के लिए सोना बरसा है।
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प्रति एकड़ 15 लीटर डीजल की खपत
एक बार की सिंचाई में प्रति एकड़ कम से कम 13 से 15 लीटर डीजल की खपत होती है। इससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाता है। बाढड़ा एरिया में तो भूजल 400 फीट नीचे तक है। इस समय किसानों को कहीं पहली तो कहीं दूसरी सिंचाई की जरूरत थी। ज्यादातर किसान बोरिंग व बिजली ट्यूबवेल आदि से ही सिंचाई करते हैं इससे किसान पर प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाता है। किसान सुरेंद्र, साहिल शर्मा, कल्ले फौगाट व चंद्र सिंह का कहना है कि इस बार रबी की फसलों के लिए बारिश अमृत बनकर आई है। रबी की फसलों की सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी।

45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पूरी तरह बारिश पर निर्भर
क्षेत्र का करीब 50 हजार हेक्टेयर बरानी एरिया तो पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर करता रहा है। इस प्रकार रबी फसल सीजन में किसानों पर लागत खर्च के रूप में करीब चार करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा पहुंचने के आसार हैं। कई लाख लीटर डीजल की बचत भी हुई है। इस मौसम की बारिश से औसत पैदावार पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। वहीं पर्यावरण को भी काफी फायदा हुआ है।


बारिश से इस बार औसत पैदावार पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा। बारिश के पानी में फसल के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। फसलों की वृद्धि एवं विकास तेज गति से होता है। दूसरी तरफ किसानों को बारिश से छह करोड़ रुपये की बचत भी हुई है। छोटे स्तर के रोगों से भी फसलों को छुटकारा मिला है। गेहूं में पहली कोर की सिंचाई की पूर्ति हो गई है।
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-डॉ. चंद्रभान, कृषि विशेषज्ञ
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