चरखी दादरी। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बीमार हैं जबकि बच्चों के उपचार की सुविधा वेंटिलेटर पर है। सुविधाओं की कमी का आलम यह है कि करीब पांच माह पहले 64 लाख से तैयार की गई एसएनसीयू यानी स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में अब तक स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। इतना ही नहीं जिले में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। इन तमाम संसाधनों की कमी से हर साल करीब 500 नवजात शिशु दूसरे जिलों में रेफर किए जा रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में 6 अगस्त 2024 को कार्यवाहक सीएमओ और वरिष्ठ चिकित्सकों ने स्पेशल न्यूबाॅर्न केयर यूनिट का शुभारंभ किया था। इसका मकसद बीमारी साथ लेकर पैदा होने वाले बच्चों को दूसरों जिलों में रेफर करने की झंझट खत्म करनी थी। अब तक सुचारु रूप से एसएनसीयू का संचालन शुरू नहीं हो पाया। मजबूरीवश विभाग को बीमार नवजात बच्चे रेफर करने पड़ रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो अस्पताल में 64 लाख 21 हजार की लागत से एसएनसीयू तैयार की गई थी। उसके बाद यहां जल्द स्टाफ की तैनाती होने की उम्मीद थी, लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया है। सरकार नागरिक अस्पताल में एसएनसीयू बनाने के बाद स्टाफ की स्वीकृति देना भूल गई है। इतना ही नहीं, जिले में एक लाख बच्चों के उपचार के लिए एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। यह पद पिछले करीब एक साल से खाली पड़ा है। नागरिक अस्पताल के अलावा मातृ-शिशु अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने का इंतजार है।
निजी अस्पताल में होता है महंगा उपचार : विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त नवजात का उपचार निजी अस्पताल में काफी महंगा पड़ता है। निजी अस्पताल संचालक प्रति बच्चा उपचार के लिए 5 से 10 हजार रुपये चार्ज करते हैं।