चरखी दादरी। जिले की मुख्य सड़कों, सरकारी परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर खड़े करीब 13 हजार सूखे और जर्जर पेड़ आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। तेज आंधी और बारिश के दौरान इनके गिरने से जान-माल के नुकसान की आशंका बनी रहती है। संभावित हादसों को रोकने के लिए वन विभाग ने ऐसे पेड़ों की पहचान कर उनकी नंबरिंग शुरू कर दी है। विभाग जल्द ही कटाई की अनुमति के लिए मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेगा, ताकि मानसून और खराब मौसम से पहले जोखिम वाले पेड़ों को हटाया जा सके।
जिले के विभिन्न मुख्य मार्गों जैसे रोहतक रोड, लोहारू रोड, मेजबान चौक और समसपुर टी-प्वाइंट सहित ग्रामीण अंचलों के सार्वजनिक स्थानों पर हजारों की संख्या में पेड़ पूरी तरह से सूख चुके हैं। ये पेड़ न केवल राहगीरों के लिए मुसीबत बने हुए हैं बल्कि शहर की हरियाली और सुंदरता को भी पूरी तरह से ग्रहण लगा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हरे-भरे पेड़ों के बीच खड़े ये सूखे तने और डालियां काफी समय से प्रशासनिक अनदेखी का शिकार थीं, जिससे शहर का स्वरूप भी प्रभावित हो रहा है।
आंधी-तूफान में टूटते हैं पेड़
हाल के दिनों में क्षेत्र में आई तेज आंधी और मौसम के बदले मिजाज ने इस खतरे को और ज्यादा उजागर कर दिया है। पिछले दिनों आई आंधी के कारण जिलेभर में सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ कर सड़कों पर आ गिरे थे जिससे कई मुख्य मार्ग घंटों तक बाधित रहे। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों के अनुसार इन सूखे पेड़ों की भारी-भरकम टहनियां और डालियां बेहद कमजोर हो चुकी हैं। हल्की सी तेज हवा चलते ही ये सूखी लकड़ियां अचानक सड़क पर चल रहे दोपहिया वाहनों और राहगीरों पर गिरने लगती हैं। रात के समय जहां स्ट्रीट लाइटें ठीक से काम नहीं करतीं वहां यह खतरा दोगुना हो जाता है। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत दर्ज कराई थी कि मानसून की शुरुआत से पहले इन खतरनाक पेड़ों को हटाया जाना बेहद जरूरी है अन्यथा कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
वन विभाग ने शुरू की है प्रक्रिया
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में सूखे और खतरनाक हो चुके पेड़ों को चिह्नित (मार्किंग) करने का कार्य अंतिम चरण में है। प्राथमिक अनुमान के मुताबिक, ऐसे पेड़ों की संख्या लगभग 13 हजार है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के लिहाज से इन पेड़ों को काटना बेहद जरूरी हो गया है।
टूटे पेड़ों को घर ले जाने से बचे लोग
वन विभाग ने इसके साथ ही आमजन से भी अपील की है कि खराब मौसम तेज आंधी या बारिश के दौरान पुराने और सूखे पेड़ों के नीचे खड़े होने या अपने वाहन पार्क करने से बचें ताकि किसी भी अप्रिय घटना से सुरक्षित रहा जा सके। वहीं उन्होंने आंधी के कारण गिरे पेड़ों उठा कर घर ले जाने की अपेक्षा सूचना वन विभाग के अधिकारियों को देने की अपील की गई है। ताकि सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचे।
वर्सन:
जिले के मुख्य रास्तों और सार्वजनिक क्षेत्रों में सूखे पेड़ों की पहचान की जा रही है। इसकी पूरी सूची तैयार कर उच्च अधिकारियों और केंद्रीय मुख्यालय को भेजी जा रही है। वहां से औपचारिक और अंतिम मंजूरी मिलते ही इन सभी 13 हजार पेड़ों की कटाई और हटाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा।
- हेमंत पारिक, जिला राजिक अधिकारी