पांच वर्षों में 6332 सैंपल फेल, केवल 35% मामलों में हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा भगवान भरोसे, सभी 45 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पद खाली
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राज्यसभा में पेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में राज्य में जांचे गए 17,394 खाद्य नमूनों में से 6,332 (लगभग 36.40%) सैंपल फेल हो गए हैं। यह चौंकाने वाला आंकड़ा दर्शाता है कि कैसे मिलावटखोर मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
चिंता की बात यह है कि इस पर लगाम कसने वाला सरकारी तंत्र भी सुस्त नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इन पांच सालों में केवल 2,444 मामलों (35.58%) में ही जुर्माना लगाया जा सका जिससे कुल 44 लाख रुपये की वसूली हुई। दूध, पनीर से लेकर मिठाइयों और मसालों तक लगभग हर चीज में मिलावट पाई गई है।
मिलावट के सर्वाधिक मामले 2021-23 में
रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि हरियाणा में मिलावटखोरी के सबसे ज्यादा मामले 2021-22 और 2022-23 के दौरान सामने आए। इन दो वर्षों में 1,000 से अधिक सैंपल मिलावटी पाए गए। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत यह राज्यों की जिम्मेदारी है कि वे खाद्य पदार्थों की नियमित निगरानी, निरीक्षण और सैंपलिंग सुनिश्चित करें।
कैसे लगेगी लगाम? जब निगरानी करने वाले ही नहीं
हरियाणा में खाद्य सुरक्षा की स्थिति कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के सभी 45 स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। इस महत्वपूर्ण काम की जिम्मेदारी अस्थायी तौर पर 12 पशु चिकित्सकों को दी गई है जो कि नाकाफी है।
पिछले पांच वर्षों का लेखा-जोखा:
2020-21: 2,596 सैंपल लिए गए, जिनमें 696 फेल हुए। 358 मामलों में कार्रवाई हुई।
2021-22: 4,235 सैंपल लिए गए, जिनमें 1,182 मिलावटी मिले। केवल 78 मामलों में कार्रवाई हुई।
2022-23: 4,445 सैंपल लिए गए, जिनमें 1,425 फेल हुए। 915 मामलों में कार्रवाई हुई।
2023-24: 3,485 सैंपल लिए गए, जिनमें 856 अमानक पाए गए। 593 मामलों में कार्रवाई हुई।
2024-25: अब तक 2,233 सैंपल लिए गए, जिनमें 500 मिलावटी मिले हैं।