लाख कोशिशों के बावजूद पुलिस के व्यवहार में कोई सुधार नहीं हो रहा। मानवाधिकार आयोग के पास एक साल में सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस विभाग के खिलाफ पहुंची हैं।
साल 2023 से लेकर 2024 तक करीब 14 महीने तक मानवाधिकार आयोग में केस की सुनवाई ठप थी। दरअसल न तो चेयरमैन थे और न ही सदस्य। इससे लंबित केसों की संख्या तेजी से बढ़ती चली गई। एक समय ऐसा आया कि नए केस का नंबर एक से डेढ़ साल के बाद आता था।
आयोग में चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति के बाद केसों की सुनवाई अब जल्दी होने लगी है। अब नए केस का नंबर एक से डेढ़ महीने में आ जाता है। आयोग का कहना है कि दिसंबर के आखिरी तक लंबित केसों की संख्या काफी घट जाएगी, जिससे नए केसों की सुनवाई अब तीन से चार दिन में हो जाएगी। पांचों दिन केस की सुनवाई हो रही है। इसलिए नए केस जल्दी जल्दी सुने जा रहे हैं।
आयोग में शिकायत दर्ज करवाने के लिए कोई फीस नहीं ली जाती है। इसके साथ यदि कोई शिकायत दर्ज करवाना चाहता है तो वह ईमेल, पोस्ट, आयोग की वेबसाइट या खुद आकर दर्ज करवा सकता है। शिकायत दर्ज करवाते समय शिकायत स्पष्ट होनी चाहिए। शिकायती पत्र में हस्ताक्षर भी होना जरूरी है। कई लोग आयोग में शिकायत भेजने के साथ दूसरे फोरम में भी शिकायत भेज देते हैं, जिसे आयोग खारिज कर देता है। आयोग का कहना है कि इससे पता नहीं चल पता है कि दूसरे फोरम ने क्या जजमेंट दिया है। आयोग प्राइवेट कंपनी व निजी विवादों की सुनवाई नहीं करता है।
केस वन : सोनीपत में पुलिस ने एक प्रतिष्ठित व्यक्ति मारपीट के आरोप में हिरासत लिया। थाने में रखने के दौरान उसके पूरे कपड़े उतार दिए। पूरी रात उसे बिना कपड़ों के रखा गया। पुलिस ने दलील दी कि कपड़ों की मदद से वह आत्महत्या कर सकता था। इस मामले की सुनवाई आयोग में चल रही है।
केस दो : पुलिस ने 107/51 के अंतर्गत प्रीवेंटिव एक्शन के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार कर पूरी रात थाने में रख दिया। पुलिस को शक था कि वह दूसरे पक्ष से झगड़ा कर सकता है। इसी अंदेशा में पुलिस ने उसे रात भर थाने में रखा। आरोपी का कहना है कि इस दौरान उसे प्रताड़ित भी किया गया। आरोपी ने इस मामले की शिकायत आयोग में दी है।
बच्चों 36
स्वास्थ्य 65
जेल 62
महिला 143
पुलिस 1290
पर्यावरण 237
पुलिस खास तौर पर थाने के मुलाजिमों को और ज्यादा संवेदनशील होने की आवश्यकता है। आला अधिकारियों को चाहिए कि वह पुलिस मुलाजिमों की नियमित ट्रेनिंग करवाएं। उन्हें लोगों से कैसे बात करनी है। किस तरह केसों की वैज्ञानिक जांच की जानी है। जांच अधिकारियों को भी ट्रेंड करने की जरूरत है। - दीप भाटिया, सदस्य, हरियाणा मानवाधिकार आयोग