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युवक का भविष्य दांव पर, नहीं रोक सकते विदेश में पढ़ाई से : हाईकाेर्ट

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-एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य मामलों में आरोपी को हाईकोर्ट ने दी अनुमति
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-कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य सुधार भी है, न कि केवल दंड
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य मामलों में आरोपी हिसार निवासी युवक को उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की अनुमति देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर उसके करियर को रोकना न्यायसंगत नहीं होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य सुधार भी है, न कि केवल दंड देना मात्र।
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21 साल के आनंद ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि उस पर कई आपराधिक मामले विचाराधीन हैं और वह उनमें जमानत पर चल रहा है। आनंद ने आवेदन दिया था कि उसे जर्मनी स्थित इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ अप्लाइड साइंसेज में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला मिला है। तीन साल का यह कोर्स करने के लिए उसे विदेश जाने की अनुमति चाहिए जिसे निचली अदालत ने 13 अगस्त 2024 को खारिज कर दिया था। याची ओर से दलील दी गई कि वह पढ़ाई करना चाहता है और उसके भविष्य के अवसरों को छीनना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा। वहीं, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि आरोपित गंभीर अपराध में संलिप्त है और विदेश जाकर कभी वापस नहीं लौटेगा। जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि विदेश जाने का अधिकार भी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है। केवल आशंका के आधार पर किसी का करियर रोकना गलत है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द करते हुए आनंद को विदेश जाने की अनुमति दे दी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट उस पर कड़े शर्तें लगा सकता है। इनमें भारी जमानत राशि, लिखित आश्वासन और आवश्यकता पड़ने पर साक्ष्य उसके बिना मौजूदगी में दर्ज करने की सहमति शामिल हो सकती है।
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