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विभागीय देरी का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतने दिया जा सकता : हाईकोर्ट

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- कर्मचारी को हाईकोर्ट ने दी 11 साल बाद राहत, कंप्यूटर टेस्ट पास करने का एक और मौका
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- यूएचबीवीएन कर्मचारी की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला


चंडीगढ़। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के कर्मचारी को राहत देते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट इन कंप्यूटर एप्रिसिएशन एंड एप्लीकेशन (सेटक) पास करने के लिए अगस्त में एक और मौका देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि विभाग की ओर से वर्षों तक परीक्षा आयोजित न करने का नुकसान कर्मचारी पर नहीं थोपा जा सकता है।
कर्मचारी महेंद्र मलिक ने याचिका दाखिल करते हुए अदालत को बताया कि उसकी नियुक्ति वर्ष 2005 में हुई थी और वर्ष 2014 में उसे पदोन्नत किया गया। उस समय 10 मई 1989 की भर्ती व पदोन्नति नीति लागू थी। बाद में 11 नवंबर 2019 को जारी कार्यालय के आदेश से पुराने निर्देशों को वापस लेते हुए कंप्यूटर टेस्ट पास करना अनिवार्य कर दिया गया। याची का कहना था कि नई शर्तों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता और इससे उसके अर्जित अधिकार प्रभावित हुए हैं।
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वहीं निगम ने दलील दी कि कर्मचारी ने पदोन्नति आदेश की शर्तों को लंबे समय तक स्वीकार किए रखा और कई सालों के बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया। निगम ने कहा कि याची कंप्यूटर टेस्ट पास नहीं कर पाया, इसलिए उसे राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने पाया कि विभाग ने कई वर्षों तक संबंधित परीक्षा आयोजित ही नहीं की। याची ने वर्ष 2022 में परीक्षा देने के लिए आवेदन किया था, लेकिन वह उसे पास नहीं कर सका। अदालत ने माना कि यदि विभाग समय पर परीक्षा आयोजित नहीं करता तो उसका दुष्परिणाम कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता। याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने यूएचबीवीएन को निर्देश दिए कि अगस्त 2026 में होने वाली परीक्षा में याची को एक और अवसर दिया जाए। साथ ही अदालत ने पदोन्नति आदेश की उस शर्त को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत परीक्षा पास न करने पर कर्मचारी को वापस पुराने पद पर भेजने का प्रावधान था। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए दी गई है और इसे अन्य कर्मचारियों के लिए मिसाल के रूप में नहीं माना जाएगा।
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