-बेहद संगीन मामले में इस तरह का रवैया अपनाने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
-रजिस्ट्री को स्पष्टीकरण प्रशासनिक स्तर पर पीठ के समक्ष सौंपने का जारी किया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने झज्जर में दर्ज हत्या मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के रवैये पर सख्त रुख अपनाते हुए नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सात सप्ताह तक प्रमुख गवाह की क्रॉस एग्जामिनेशन टालने पर ट्रायल जज से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि स्पष्टीकरण प्रशासनिक स्तर पर पीठ के समक्ष पेश किया जाए।
जस्टिस सुमित गोयल की पीठ ने कहा कि इस तरह की देरी निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों के विपरीत है और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का उल्लंघन है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विनोद कुमार बनाम पंजाब सरकार और हाल ही में दिए गए स्वामी बनाम स्टेट (2024) मामलों का हवाला दिया। इसमें स्पष्ट किया गया था कि गवाह की जिरह उसी दिन पूरी की जानी चाहिए जिस दिन उसका मुख्य बयान दर्ज किया गया हो। देरी से गवाह पलट भी सकते हैं और इससे न्याय प्रभावित होता है। इस मामले में शिकायतकर्ता/आंखों देखा गवाह विनोद कुमार की आंशिक जिरह 8 जुलाई को हुई थी और इसे 22 सितंबर तक टाल दिया गया। रिपोर्ट में ट्रायल जज ने बताया कि नौ आरोपियों की ओर से अलग-अलग वकील पेश हुए हैं और सभी ने अलग-अलग जिरह की मांग की जिस कारण गवाह की गवाही एक ही दिन में पूरी नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने इसे चिंताजनक बताते हुए ट्रायल जज से प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टीकरण तलब किया है। हाईकोर्ट में आरोपियों की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी।