-सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को मिलेगी पदोन्नति का लाभ
-हाईकोर्ट ने विभाग की कार्रवाई को दिया अमान्य करार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में स्पष्ट किया कि पदोन्नति में आरक्षण केवल वैधानिक सेवा नियमों में संशोधन के बाद ही लागू किया जा सकता है।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने हरियाणा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक मामले में यह फैसला सुनाते हुए कहा कि विभाग ने बिना नियमों में संशोधन किए आरक्षण का लाभ जूनियर कर्मचारियों को दे दिया जिससे सीनियर सामान्य वर्ग के कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हुआ। अदालत ने ऐसे सभी पदोन्नतियों को अवैध घोषित करते हुए सामान्य वर्ग के पात्र कर्मचारियों को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट और सुपरिंटेंडेंट के पदों पर पिछली तिथि से पदोन्नति देने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि संविधान विशेषाधिकार का दस्तावेज नहीं बल्कि न्याय का ढांचा है। पिछड़े वर्गों की उन्नति आवश्यक है लेकिन यह प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर और समानता के सिद्धांत को बनाए रखते हुए होनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान आरक्षण की अनुमति देता है लेकिन इसका लाभ तभी दिया जा सकता है जब सरकार इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए। कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति सिर्फ पद बढ़ना नहीं है बल्कि यह योग्यता, अनुभव और सेवा समर्पण की मान्यता है। यदि बिना स्पष्ट नियमों के पदोन्नति में आरक्षण दिया जाता है, तो इससे सीनियर कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं और सेवा संरचना का संतुलन बिगड़ता है।